26 अप्रैल को दोबारा अस्पताल पहुंचीं, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले
चित्रलेखा ने बताया कि जब 26 अप्रैल को पैर काम नहीं करने की शिकायत लेकर अस्पताल गईं, तो उन्हें बताया गया कि डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद 29 अप्रैल को जब वह दोबारा पहुंचीं, तब डॉक्टर ने कहा कि गलत इंजेक्शन लग गया है, अब न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाना पड़ेगा।
परिजनों का आक्रोश, अस्पताल में हुआ हंगामा
इस मामले को लेकर पीड़िता के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। चित्रलेखा के पति दिनेश यादव ने बताया कि उनकी पत्नी स्कूटी चलाकर बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने का काम करती थीं, लेकिन अब घर की स्थिति और बिगड़ गई है। पीड़िता के भाई अक्षय यादव ने बताया कि जब इलाज के दस्तावेज नहीं दिए जा रहे थे, तब उन्होंने गुस्से में आकर जबरन कागज छीन लिए।
अस्पताल प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष
इस मामले में होली क्रॉस अस्पताल की अधीक्षिका डॉ. दीपशिखा ने बयान जारी कर कहा कि चित्रलेखा 15 अप्रैल को ओपीडी में आई थीं, भर्ती नहीं थीं। उन्होंने कहा कि इंजेक्शन से कभी-कभी दर्द बढ़ सकता है, लेकिन इससे पैरालिसिस होने का आरोप तथ्यहीन है।
पुराने विवादों से पहले से घिरा है होली क्रॉस
यह पहली बार नहीं है जब होली क्रॉस अस्पताल विवादों में आया हो। इससे पहले इसी परिसर के होली क्रॉस नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या विंसी जोसफ पर धर्मांतरण के प्रयास के गंभीर आरोप लगे थे, जिस पर जमकर सियासत गरमायी थी। वह फरार चल रही हैं। अब इस मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। यह अस्पताल न केवल जशपुर बल्कि झारखंड और ओडिशा की सीमावर्ती आबादी के लिए भी ईसाई मिशनरी संस्था का एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा केंद्र है।
पीड़िता अब राउरकेला में कराएगी इलाज, कुनकुरी थाने में दी गई सूचना
पीड़िता के परिजन इलाज के लिए अब राउरकेला रवाना हो चुके हैं और इस संबंध में कुनकुरी थाने में सूचना देकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं।