जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित नहर का तटबंध टूट गया। विभाग की लापरवाही से टूटे तटबंध से जो पानी किसानों को मिलना था। वह बहकर नदी में जा मिला। विभाग द्वारा अब लीपापोती की जा रही है।
जल संसाधन विभाग कोरबा द्वारा निर्मित दाई तट नहर का तटबंध कोरबा और उरगा के मध्य टूट गया। तटबंध का ऊपरी हिस्सा तो सुरक्षित रहा। लेकिन नीचे बड़ा होल हो जाने के कारण पानी तीव्र गति से बहने लगा। कुछ ग्रामीणों ने जब पानी बहते हुए देखा तो इसकी सूचना सिंचाई विभाग तक पहुंचाई।
स्थानीय लोगों की मानें तो घटना देर रात की है। नहर में पानी का बहाव बहुत तेज था। सुबह जब लोगों की नजर पड़ी तब लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। पानी का तेज बहाव किसान के खेत और नदी किनारे बाड़ी में होते हुए हसदेव नदी में जा रहा था। रात भर पानी बहने के बाद सुबह पता चला तब संबंधित विभाग सुबह मौके पर पहुंचे।
ये कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी सीतामढ़ी क्षेत्र में एक बड़ा हिस्सा का मध्य तटबंध टूट गया था। इसके बाद पानी आसपास घरों में घुस गया था। इस घटना के बाद भी हाहाकार मच गई। स्थानीय जिला प्रशासन को मौके पर पहुंच घटनाक्रम लेकर लोगों को राहत प्रदान की। जिसके बाद काफी लंबे समय तक मरम्म कार्य चला था।
नहर का तटबंध टूटने की जानकारी मिलने पर जल संसाधन विभाग की एक इंजीनियर संजू मानिकपुरी मौके पर पहुंची। उन्होंने बताया की रात लगभग 10 बजे इस तटबंध के टूटने की जानकारी विभाग को मिली। आगे का काम शुरू किया जाएगा।
जल संसाधन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नहर के टूटे हिस्से को दुरुस्त करने में लगे हुए हैं। जहां पानी की सप्लाई डेम से बंद कर काम शुरु करने की बात कही है। गौरतलब है कि कोरबा जिले में बाई तट और दाई तट नहरों से चांपा जांजगीर, रायगढ़ ,शक्ति और आसपास के अन्य जिलों के किसानों को पानी उपलब्ध कराया जाता है। दोनों नहरों से उपलब्ध कराए गए पानी का ही प्रताप है कि छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक धान और अन्य फसलों की पैदावार इसी क्षेत्र में होती है। लगभग तीन दशक पूर्व निर्मित की गई। इन नहरों के रखरखाव के लिए प्रदेश सरकार की ओर से पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं कराई जाती जो राशि आवंटित भी कराई जाती है। उसकी बंदरबांट कैसे की जाती है। यह किसी से छिपा नहीं है।