भू-धसान की घटना की जानकारी लेने उर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन मौके पर पहुंचा और हालात की जानकारी लेने के साथ ही ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि एसईसीएल के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया है।
एसईसीएल की चिरमिरी कोल परियोजना की विजय वेस्ट कोयला खदान के कारण जिले के अंतिम छोर में बसे पसान क्षेत्र के कई ईलाकों में हो रही भू-धसान की घटना ने ग्रमीणों को दहशत में डाल दिया है। भू-धसान की घटना की जानकारी लेने उर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन मौके पर पहुंचा और हालात की जानकारी लेने के साथ ही ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि एसईसीएल के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए एसईसीएल प्रबंधन हर हद को पार करने को तैयार है। आलम ये है कि प्रबंधन को लोगों की जान से भी कोई सरोकार नहीं है तभी तो कोल उत्पादन के कारण हो रहे भू-धसान की घटना से प्रभावित लोगों की पूछ परख करने तक की जहमत प्रबंधन नहीं उठाना चाहता। एसईसीएल की चिरमिरी कोल परियोजना की विजय वेस्ट कोयला खदान के कारण कोरबा के अंतिम छोर पर बसे पसान क्षेत्र के कई ईलाकों में भू-धसान की घटना हुई।
जमीन पांच फिट नीचे धंस गई और कई स्थानों पर सुरंग बन गया। घटना की जानकारी लेने उर्जाधानी भू-विस्थापित संगठन मौके पर पहुंचा और जंगल के भीतर बनी दरारें और सुंरग का निरिक्षण किया। उन्होंने पाया कि एसईसीएल की लापरवाही से सब कुछ हुआ है जिसकी शिकायत उन्होंने धनबाद स्थित खान सुरक्षा महानिदेशालय के निदेशक से की है। गांव के पंच मानमति पंडो ने बताया कि एसईसीएल के कारण उनकी घर की जमीनें दरकने लगी है। पानी प्रदूषित होने लगा है लेकिन प्रबंधन को इससे कोई सरोकार नहीं है।