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Gariaband: किसान सभा बोली- न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी चाहिए, फसलों के दामों में बढ़ोतरी नाकाफी

Thu, 08 Jun 2023 03:44 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गरियाबंद

सार

किसान सभा के सचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसी भी फसल का लागत से डेढ़ गुणा न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के पक्ष में दिखाई नहीं दे रही है। 
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तेजराम विद्रोही, किसान नेता। - फोटो : संवाद
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केंद्र सरकार ने बुधवार को खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 के लिए फसलों के दामों में वृद्धि किया है। इसके बाद अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा ने बढ़े दामों को नाकाफी बताया है। कहा कि, यह एक रीति की तरह है। जैसे हर साल महंगाई दर बढ़ती है, सरकार भी मजदूरी दर में वृद्धि करती है। उसी प्रकार कृषि उत्पाद के दामों में भी थोड़ी वृद्धि कर दी जाती है जो कि यह नाकाफी है। 

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किसान सभा के सचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसी भी फसल का लागत से डेढ़ गुणा न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के पक्ष में दिखाई नहीं दे रही है। जो मूल्य सरकार तय करती है वह भी किसानों को उनके उपज का पूरे साल भर न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके इसके लिए कोई कानूनी गारंटी दे रही है। 

कहा कि, फसलों की दामो में मामूली वृद्धि से किसान संतुष्ट नहीं हैं। किसानों को उनके सभी फसलों के लिए 12 महीने न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मिल सके यह कानून चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप लागत से डेढ़ गुणा होनी चाहिए।

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