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Hidma: नक्सली हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का पूवर्ती गांव में हुआ अंतिम संस्कार, शव से लिपटकर राेते रहे परिजन

Thu, 20 Nov 2025 02:34 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़–आंध्रप्रदेश सीमा पर 18 नवंबर की सुबह हुई बड़ी मुठभेड़ में ढेर कुख्यात नक्सली माडवी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का रविवार को सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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अंतिम संस्कार के दौरान चार–पांच गांवों के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़-आंध्रप्रदेश सीमा पर 18 नवंबर की सुबह हुई बड़ी मुठभेड़ में ढेर कुख्यात नक्सली माडवी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का रविवार को सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में अंतिम संस्कार किया गया। सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी के बीच हिड़मा के पैतृक गांव पूवर्ती में 
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चार गांव के लोगों की भीड़ जुटी। इस दौरान हिड़मा की मां शव से लिपटकर जोर–जोर से विलाप करती रही। पास खड़ी सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी भी खुद को संभाल नहीं पाईं और हिड़मा के शव से लिपटकर रोने लगीं। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए हिड़मा के शव को काले पैंट-शर्ट पहनाकर अंतिम यात्रा निकाली गई, जबकि उसकी पत्नी राजे को लाल जोड़े में पारंपरिक रीति-रिवाज से विदाई दी गई।


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परिजनों ने पहले ही शासन–प्रशासन से मांग की थी कि शव गांव में ही अंतिम संस्कार के लिए शव दिया जाये। उनकी मांग पर सहमति देने के बाद दोनों के शव शनिवार देर शाम गांव पहुंचाए गए, जिसके बाद सुबह से ही चारों तरफ के गांवों से लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान चार पांच गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में जुटे। 




मुठभेड़ में ढेर हुए थे सात नक्सली
18 नवंबर को हुए संयुक्त अभियान के दौरान छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश की सीमा पर सुरक्षा बलों ने सात नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें हिड़मा और उसकी पत्नी राजे भी शामिल थे। यह वही इलाका है जहां बीते कई वर्षों से नक्सलियों की बड़ी गतिविधियां संचालित होती रही हैं।
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माडवी हिड़मा को नक्सल संगठन का सबसे खूंखार नक्सली माना जाता था। 35 वर्ष की उम्र में वह करीब 300 से अधिक हत्याओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहा। लगभग दो दशक तक वह नक्सली संगठन की दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी का सक्रिय चेहरा रहा। उसके सिर पर कई राज्यों में मिलाकर करोड़ों का इनाम घोषित था। हिड़मा पर 2010 में हुई दंतेवाड़ा बस हमला, 2013 का झीरम घाटी कांड, कई आईईडी विस्फोट, पुलिस–बलों पर हमले और ग्रामीणों की हत्या सहित सैकड़ों संगीन आरोप थे। राजे भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती थी और कई मामलों में सह-आरोपी थी।






अंतिम संस्कार के दौरान गांव में एक ओर जहां मातम का माहौल था, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि चाहे हिड़मा कितना भी बड़ा नक्सली क्यों न रहा हो, लेकिन उनके लिए वह “गांव का बेटा” था। यही कारण रहा कि अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में स्थानीय पहुंचे। 
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