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क्या गांव में परोसा गया था मौत का जाम: 4 महीने में 8 मौतें, जहरीली शराब का शक, अब कब्रों से निकाले जा रहे सबूत

Sun, 14 Jun 2026 03:31 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

Kharve's death mystery: खर्वे गांव में बीते चार महीनों के दौरान आठ लोगों की मौत हुई। शुरुआत में इन मौतों को सामान्य माना गया, लेकिन जैसे-जैसे संख्या बढ़ती गई, ग्रामीणों के मन में संदेह गहराता गया। आखिर एक ही गांव में लगातार इतनी मौतें क्यों हो रही हैं? 
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कब्र से निकाला गया शव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Balodabazar Murder History: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में लगातार आठ लोगों की मौत ने सबको हैरान कर दिया है। खर्वे गांव इन दिनों रहस्य के साये में है। ऐसी चर्चा है कि कथिततौर पर रहस्यमयी खजाने की चाहत में 21 लोगों की नरबलि की साजिश रची गई थी। हालांकि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। चार महीने के भीतर हुई आठ ग्रामीणों की मौत से गांव में दहशत है। चर्चा है कि ये सामान्य मौतें नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक खतरनाक साजिश हो सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब में जहर मिलाकर लोगों को मौत के घाट उतारा गया है। अब इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम कब्र तक पहुंची।
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बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के खर्वे गांव में बीते चार महीनों के दौरान आठ लोगों की मौत हुई। शुरुआत में इन मौतों को सामान्य माना गया, लेकिन जैसे-जैसे संख्या बढ़ती गई, ग्रामीणों के मन में संदेह गहराता गया। आखिर एक ही गांव में लगातार इतनी मौतें क्यों हो रही हैं? क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई सुनियोजित खेल छिपा है?

8 मौतें और एक जैसे सवाल
ग्रामीणों को शंका है कि गांव के ही रामसाय जायसवाल ने शराब में जहर मिलाकर बद्री पटेल, बुटालु साहू, छत्तूराम साहू, बुदलू जायसवाल, विनोद साहू, गजानन मांझी, चैतु साहू, महेतरू साहू लोगों को पिलाया।  इस वजह से इन लोगों की मौत हुई। ग्रामीणों ने थाना पहुंचकर इस पूरे मामले की शिकायत की थी और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच होती, तो शायद कई जानें बचाई जा सकती थीं। सभी लोग आरोपियो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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कब्र तक पहुंची जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान दफन किए गए शवों को बाहर निकालकर वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है। विशेषज्ञों का प्रयास है कि मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। शवों से लिए गए नमूनों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौतें किसी जहरीले पदार्थ के सेवन से हुईं या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, रासायनिक परीक्षण और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि ग्रामीणों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

गांव में डर, गुस्सा और इंतजार
खर्वे गांव में फिलहाल भय और अनिश्चितता का माहौल है। ग्रामीणों की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इन आठ मौतों के पीछे असली वजह क्या है- जहरीली शराब, लापरवाही या फिर कोई गहरी साजिश? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कब्र से निकाले जा रहे सबूत खर्वे गांव की इस रहस्यमयी कहानी का सच सामने ला पाएंगे या नहीं। आने वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट ही इस पूरे मामले की दिशा और तस्वीर साफ करेगी।
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