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कबीरधाम: शिक्षा विभाग में 218 करोड़ का भ्रष्टाचार, दो कर्मचारी निलंबित, वित्तीय अनियमितता की जांच शुरू

Sat, 31 Jan 2026 03:45 PM IST
कबीरधाम ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम

सार

कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में 218 करोड़ रुपये की भारी-भरकम वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर होने से हड़कंप मच गया है। कवर्धा ब्लॉक एजुकेशन कार्यालय (बीईओ) से जुड़े इस प्रकरण में तत्कालीन दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
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जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय कबीरधाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में 218 करोड़ रुपये की भारी-भरकम वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर होने से हड़कंप मच गया है। कवर्धा ब्लॉक एजुकेशन कार्यालय (बीईओ) से जुड़े इस प्रकरण में तत्कालीन दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में आय-व्यय के लेखा-जोखा में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसके बाद विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।

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इस मामले में वर्ग-2 के कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबित किया गया है। योगेंद्र कश्यप पर फरवरी 2023 से जनवरी 2024 तक बीईओ कार्यालय में पदस्थ रहते हुए वित्त शाखा का प्रभार संभालने के दौरान कैशबुक न लिखने और आय-व्यय का कोई भी लेखा-जोखा संधारित न करने का आरोप है। इसी प्रकार, माया कसार पर फरवरी 2024 से जून 2025 तक पदस्थ रहने के दौरान, जब वह भी वित्त शाखा का प्रभार संभाल रही थीं, कैशबुक न लिखने और वित्तीय अभिलेखों का संधारण न करने का आरोप है।

वित्तीय अनियमितता के मुख्य बिंदु
दोनों कर्मचारियों पर शिक्षा विभाग से जुड़े वित्तीय लेन-देन, भुगतान प्रक्रिया और लेखा अभिलेखों में अनियमितता करने का संदेह है। यह मामला विभिन्न मदों में किए गए भुगतानों और उनके उचित लेखा-जोखे से संबंधित है। प्रारंभिक जांच के दौरान दस्तावेजों के मिलान में बड़ी राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
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जांच और निलंबन की कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधान पाठक कुंभकरण कौशिक द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक की राशि अप्राप्त होने और संबंधित फाइल के गायब होने की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई। इसके बाद कराए गए ऑडिट में दोनों कर्मचारियों के कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। इन अनियमितताओं के आधार पर ही दोनों कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया है। विभागीय जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इतनी बड़ी राशि का हिसाब क्यों नहीं रखा गया और इसमें किसकी संलिप्तता है।

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