सुकमा जिले के लेदा गांव में वरिष्ठ पत्रकार नेमीचंद जैन की मंगलवार को हत्या कर दी गई। बुधवार सुबह उनका शव गृहग्राम तोंगपाल से ढाई किमी. दूर ग्राम पंचायत लेदा में सड़क पर मिला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना नेमीचंद के छोटे भाई जोगराज को दी।
शव के साथ भाकपा माओवादी कांकेर घाटी दरभा डिविजन लिखा हुआ एक पत्र भी मिला है। पत्र में हत्या का कारण मुखबिरी करना बताया गया है। हालांकि छोटे भाई जोगराज ने इसे नक्सली घटना मानने से इंकार कर दिया है। नेमीचंद आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (लेम्स) के उपाध्यक्ष थे। वो जनपद सदस्य भी रह चुके हैं।
परिजनों के अनुसार 41 वर्षीय नेमीचंद मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे किसी ग्रामीण युवक को अपने साथ लेकर बाइक से तोंगपाल से 13 किमी. दूर नामा बाजार गए हुए थे। वहां उन्हें तोंगपाल के कई व्यापारियों ने देखा भी था। नेमीचंद किसी कोया नामक व्यक्ति के परिवार में शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वहां से लेदा चले गए। रात को घर वापस नहीं लौटने पर उनके छोटे भाई जोगराज ने उन्हें कॉल किया पर उनका मोबाइल कवरेज क्षेत्र के बाहर जा रहा था।
देर रात वापसी के दौरान बस्ती के बीच अटल चौक पर उनकी धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या कर दी गई। घटनास्थल पर उनकी मोटरसाइकिल भी नहीं मिली है। उनके साथ गए एक अन्य व्यक्ति के बारे में कोई पता नहीं चल सका है। हत्याकांड के विरोध में बुधवार को तोंगपाल पूरी तरह बंद रहा। पास में ही लगने वाले पुसपाल बाजार में भी भीड़भाड़ कम रही।
नक्सली हमले से इंकार
वहीं नेमीचंद के छोटे भाई जोगराज जैन ने नक्सली हमले से इंकार किया है। उनका कहना है कि नेमीचंद एक निडर पत्रकार थे। उन्हें नक्सलियों की तरफ से कभी कोई धमकी या चेतावनी नहीं मिली। इसलिए वह संवेदनशील क्षेत्र में रात में भी घूमते थे। बीते 26 जनवरी को क्षेत्र में अवैध उत्खनन से जुडे़ एक व्यवसायी के लड़कों से उनकी मारपीट हुई थी।
एसडीओपी लखन पटने ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में पांच संदिग्धों को पकड़ा है। साथ ही 26 जनवरी को तोंगपाल की जिन दो युवकों पंकज और आलोक से मारपीट हुई थी उन्हें भी पकड़ा गया है। माओवादियों की करतूत के साथ ही आपसी रंजिश भी हत्या का कारण हो सकता है। पुलिस दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुये जांच कर रही है।