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Jagdalpur: गोबर से बिजली बननी शुरू, पहले दिन चलाए गये संयंत्र के बिजली उपकरण,10 किलो वाट तक बढ़ाई जाएगी क्षमता

Fri, 10 Feb 2023 02:11 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

सार

महापौर और आयुक्त ने कहा कि अभी संयंत्र को शुरू किया गया है। पहले दिन ज्यादा बिजली उत्पादित नहीं की गई है, लेकिन इसकी क्षमता को धीरे से बढ़ाया जायेगा। निगम आयुक्त ने बताया कि हम कोशिश कर रहे हैं कि इस संयंत्र से हर दिन दस किलो वाट बिजली पैदा हो।
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बायोगैस संयंत्र में बिजली का उत्पादन शुरू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जगदलपुर में शहर के शिवमंदिर वार्ड स्थित बायोगैस संयंत्र में बुधवार को बिजली का उत्पादन शुरू किया गया। पूरे संभाग में यह पहला मौका है जब गोबर से गैस बनाने का काम इतने व्यापक स्तर पर किया गया है। संयंत्र में जैसे ही बिजली का उत्पादन हुआ तो नगर निगम ने पहली बार संभाग में गोबर से बिजली बनाने का खिताब भी अपने नाम कर लिया है। गोबर से बिजली बनाने की शुरूआत के दौरान महापौर सफीरा साहू, आयुक्त दिनेश नाग व अन्य जनप्रतिनिधी भी मौके पर मौजूद रहे। 

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महापौर और आयुक्त ने कहा कि अभी संयंत्र को शुरू किया गया है। पहले दिन ज्यादा बिजली उत्पादित नहीं की गई है, लेकिन इसकी क्षमता को धीरे से बढ़ाया जायेगा। निगम आयुक्त ने बताया कि हम कोशिश कर रहे हैं कि इस संयंत्र से हर दिन दस किलो वाट बिजली पैदा हो। गौरतलब है कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) ट्रांबे और कार्तिकेय साराभाई की संस्था सेंटर फार इनवायरमेंट एजुकेशन (सीईई) के तकनीकी मार्गदर्शन में यहां गोबर से बिजली बनाने का काम किया जा रहा है। गोबर से बिजली बनाने के संयंत्र का लोकार्पण 26 जनवरी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों किया गया था, लेकिन उस दौरान बिजली का उत्पादन शुरू नहीं किया गया था।

 क्षमता को बढ़ाकर संयंत्र के आसपास बांटे जायेंगे कनेक्शन
बायोगैस संयंत्र से पहली बार जो बिजली उत्पादित हुई है उससे संयंत्र के बिजली उपकरण ही जैसे पंखे, लाइट, एग्जॉस्ट फेन व अन्य बिजली के उपकरण चलाये गये हैं। जैसे ही संयंत्र से बिजली पैदा हुई और इस बिजली से उपकरण चलने लगे तो यहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की। अफसरों ने बताया कि अभी ट्रायल के तौर पर बिजली पैदा की गई है। इस संयत्र की क्षमता हर दिन दस किलो वाट बिजली पैदा करने की है अभी पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन की शुरूआत की जायेगी और यहां पैदा होने वाली बिजली संयंत्र के आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों को ही दी जायेगी। इसके लिए बाकायदा कनेक्शन लोगों को बांटे जायेंगे।
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ऐसे हुआ बिजली का उत्पादन 
बायोगेस संयंत्र में सबसे पहले सीमेंट से बने इनलेट चैंबर में गोबर और पानी का घोल तैयार किया गया। यह घोल लोहे से ढका हुआ और 15 फीट गहरे बायोगैस संयंत्र में जाता है। गैस एक पाइप के जरिए बायोगैस बैलून में स्टोर होता है। गोबर गैस में मीथेन के अलाव और कई गैस होती हैं। ऐसे में यहां 3 स्क्रबर लगाए गए हैं। इसमें मीथेन गैस को फिल्टर कर अलग किया जाता है। इसके बाद जनरेटर की सहायता से बिजली उत्पादन होता है। दस किलो वाट बिजली बनाने के लिए हर दिन करीब 250 किलो गोबर और 250 लीटर पानी लगेगा।
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