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Jagdalpur : जिन हाथों में कभी बंदूकें थीं, अब वो बनाएंगे दूसरों के आशियाने

Sat, 06 Jun 2026 03:58 PM IST
जगदलपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

सार

पुनर्वास केंद्र में रह रहे 25 आत्मसमर्पित नक्सलियों, जिनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं, को राजमिस्त्री का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
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विस्तार
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कभी घोर नक्सल प्रभावित रहे सुकमा जिले में अब शांति, विश्वास और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। एक समय जिन हाथों में बंदूकें थीं, आज उन्हीं हाथों में निर्माण के औजार हैं और भविष्य को संवारने के सपने हैं।

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पुनर्वास केंद्र में रह रहे 25 आत्मसमर्पित नक्सलियों, जिनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं, को राजमिस्त्री का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से इन्हें रोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है। प्रशासन की यह पहल केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के दुर्गम और विकास से वंचित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को गति देने का माध्यम भी बनेगी। लंबे समय से कुशल राजमिस्त्रियों की कमी से प्रभावित विकास कार्यों में अब यही प्रशिक्षित युवा योगदान देंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

कोंटा क्षेत्र की निवासी सोड़ी हूंगी ने बताया कि हिंसा का रास्ता छोड़ने के बाद अब उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि राजमिस्त्री का काम सीखकर वे अपने पैरों पर खड़ी होंगी और अपने परिवार का सहारा बनेंगी। वहीं जगरगुंडा के मंडीमरका निवासी पदम रैनू ने कहा, पहले हमारा जीवन जंगलों में बेहद कठिनाई और अनिश्चितता में बीतता था, जहां रहने-खाने का कोई ठिकाना नहीं था। आज सरकार की बदौलत हमें आवासीय सुविधाएं और राजमिस्त्री बनने का प्रशिक्षण मिल रहा है। इससे हम आत्मनिर्भर बनेंगे और अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर पाएंगे।
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कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि आत्मसमर्पण का वास्तविक अर्थ केवल हथियार छोड़ना नहीं, बल्कि समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आत्मनिर्भर बनना है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पुनर्वासित युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्थायी और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह पहल सुकमा में शांति, विश्वास और विकास की मजबूत नींव रख रही है। जिला प्रशासन का यह प्रयास साबित करता है कि अवसर, विश्वास और रोजगार मिलने पर युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास और आत्मनिर्भरता की राह चुन सकते हैं।

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