केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आने से कुछ घंटे पहले सीआरपीएफ डीजी ने प्रेसवार्ता की। जिसमें डीजी ने कहा कि हथियारों के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है। अगर ऐसा होता है तो यह सीआरपीएफ के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगी। डिजिटल होने से नक्सलियों द्वारा जवानों से लूटे गए हथियार नक्सलियों के किसी काम के नहीं रह जाएंगे। वहीं, देखा जाए तो पहले की तुलना में हथियार लूटे जाने की घटनाएं अब कम हो गई हैं। माओवादियों के लीडरों को टारगेट करने के साथ ही अपने प्रभाव वाले इलाकों में वृद्धि करना हमारा टारगेट है।
वीडियो कॉल से बातचीत होने के दौरान छोटी बड़ी परेशानियों का जिक्र जवानों को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। हालांकि, हर जवान में यह शिकायत आम नहीं है, हम इसका ख्याल रखते हैं, छुट्टियों का भी रोटेशन तैयार है, हमने ड्रोन का इस्तेमाल अपनी सहूलियत के लिए करते हैं। कैम्पों का विरोध ग्रामीण कर रहे हैं, लेकिन यह विरोध क्यों हो रहा है, यह सब समझ रहे हैं, इस पर ज्यादा विस्तार से बात करने की जरूरत नहीं है। कई राज्यों में हमने नक्सलियों की सप्लाई लाइन तोड़ी है, छत्तीसगढ़ में इस दिशा में बेहतर काम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जल्द इसके परिणाम दिखने को मिलेगा।
नई दिल्ली से बस्तर तक 1848 किलोमीटर लंबी बाइक रैली बड़ा संदेश देती है। दल में शामिल की गई महिला कमांडो ऐसी हैं, जिन्होंने पहले कभी साइकिल भी नहीं चलाई थी, इतना लंबा सफर पूरा कर आत्मविश्वास का परिचय दिया। सीआरपीएफ इकलौती फोर्स है जिसमें 5 महिला अफसर बड़े पदों पर सेवाएं दे रही है। जो नारी सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है। करनपुर कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस प्रेसवार्ता में सुजॉय लाल थाउसेन डीजी सीआरपीएफ, नितिन अग्रवाल एडीजी ओपीएस, वितुल कुमार एडीजी सीजेड, एनी अब्राहम आईजी आरएएफ, केएम यादव आईजी वीएसडब्ल्यू,