बनियागांव जगदलपुर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गांव के प्रवेशद्वार पर ही आपको एक जवान की मूर्ति नजर आयेगी। जिस पर लिखा है शहीद श्रवण कश्यप जिंदाबाद। ये गांव है श्रवण कश्यप का। जिन्होंने बीजापुर के टेकलगुड़ेम में हुए नक्सली हमले में मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। उनके बलिदान को सम्मान देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें नक्सल ऑपरेशन में सर्वोच्च साहस और बलिदान के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सली हमले में वीरगति को प्राप्त छत्तीसगढ़ के तीनों शहीद जवानों को नमन किया और उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि जवानों के सर्वोच्च साहस और बलिदान के लिए कीर्ति चक्र मिलना परिवारजनों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। कीर्ति चक्र से सम्मनित होने की बात जब उनके बचपन के दोस्त दयाराम गोयल को पता चली तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। श्रवण के बारे में बातचीत करते हुए दयाराम कहते हैं कि श्रवण ऐसे व्यक्ति थे, जो सभी को मदद करते थे। उन्होंने अपने परिवार को गरीबी से निकाला। दयाराम कहते हैं कि गांव के चौराहे पर जब भी वे जाते हैं, उन्हें लगता है कि श्रवण ही खड़े हैं। वे बचपन से ही देश सेवा करना चाहते थे और उन्होंने ऐसा किया। कीर्ति चक्र के बारे में बात करते हुए दयाराम कहते हैं कि पूरे गांव को उन्होंने गौरवान्वित किया है।
गांव के ही 60 वर्षीय महादेव ने बताया कि वे श्रवण को बचपन से जानते हैं और वे अपने माता पिता और बड़े भाई के लिए सहारा थे। बनियागांव के बाहर ही प्राथमिक स्कूल है। जहां से श्रवण ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की। इस स्कूल के शिक्षक हतिमराम बागरे ने श्रवण के बारे में कहा कि वे बचपन में भी काफी अनुशासन प्रिय थे। बनियागांव स्कूल के लिए गर्व की बात है कि उनके श्रवण ने देश के लिए बलिदान दिया।
बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित गरिमामय समारोह में छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन में शहीद तीन जवानों, उपनिरीक्षक श्री दीपक भारद्वाज, शहीद प्रधान आरक्षक सोढ़ी नारायण और शहीद एसटीएफ प्रधान आरक्षक श्रवण कश्यप के परिजनों को कीर्ति चक्र दिया गया।