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'तेजी से खत्म हो रहा नक्सलवाद' : अमित शाह बोले- सुरक्षा के साथ विश्वास का बना माहौल, हर मोर्चे पर होगा काम

Sat, 13 Dec 2025 03:03 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

सार

प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित बस्तर ओलंपिक-2025 के समापन समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, मैदान में बहता पसीना तय करेगा।
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जगदलपुर में अमित शाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिस बस्तर को कभी नक्सल हिंसा, आईईडी धमाकों और खून-खराबे से जोड़कर देखा जाता था, उसी धरती पर अब खेल का उत्सव नई कहानी लिख रहा है। प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित बस्तर ओलंपिक-2025 के समापन समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, मैदान में बहता पसीना तय करेगा।  इस ओलंपिक में बस्तर संभाग के 7 जिलों से 2676 खिलाड़ी मैदान में उतरे। खास बात यह रही कि इनमें 761 से अधिक वे युवा भी शामिल रहे, जो कभी भटके हुए थे और आज समाज की मुख्यधारा में लौटकर खेल के जरिए नया भविष्य गढ़ रहे हैं।

 

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2030 तक बदलेगी बस्तर की तस्वीर

अमित शाह ने मंच से ऐलान किया कि 2030 तक बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। इसके लिए बुनियादी सुविधाओं से लेकर रोजगार तक हर मोर्चे पर काम होगा। उन्होंने कहा हर गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी, हर घर में बिजली होगी। वन उपज को मूल्य देने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगेंगी और डेयरी सेक्टर में बस्तर देश में नई पहचान बनाएगा।

 

पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया - फोटो : अमर उजाला
तेजी से खत्म हो रहा नक्सल प्रभाव
गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर अब तेजी से नक्सलवाद मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में हालात बदले हैं, सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास का माहौल बना है। यही कारण है कि युवा हिंसा छोड़कर खेल, पढ़ाई और रोजगार की ओर लौट रहे हैं।
 
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अंतरराष्ट्रीय खेलों तक पहुंचेगा बस्तर
अमित शाह ने खिलाड़ियों को राम-राम कहते हुए उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि उनका सपना है कि आने वाले समय में नक्सल मुक्त बस्तर ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराए। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे 2026 में भी बस्तर आएंगे और इस बदलाव को अपनी आंखों से देखेंगे। बस्तर ओलंपिक-2025 सिर्फ खेल आयोजन नहीं, बल्कि उस बदलाव की तस्वीर है, जहां हिंसा की जगह हुनर और डर की जगह उम्मीद ने ले ली है।
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