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नक्सली इलाके के जिन बच्चों ने कभी जूते नहीं पहने थे, आईटीबीपी ने उन्हें बनाया हॉकी में पारंगत

Fri, 08 Mar 2019 05:28 PM IST
अनिल पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जनजातीय बालिकाओं की हॉकी टीम
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बस्तर, जी हां छत्तीसगढ़ के इस जिले का नाम सुनते ही नक्सलवाद की भयावह तस्वीर सामने आ जाती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र की बालिकाओं, वो भी जनजातीय समुदाय से आने वाली, ने आईटीबीपी की मदद से कुछ ऐसा कर दिया है कि महिला दिवस पर उन्हें पूरे देश की ओर से बधाई मिल रही है।

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नक्सल हिंसा के बीच रहने वाली ये बालिकाएं अत्यंत गरीब परिवारों से आती हैं।उन्हें जूते के फीते तक बाँधने नहीं आते थे। आईटीबीपी ने जब इनकी ओर मदद का हाथ बढ़ाया तो इन्होंने भी हाकी स्टिक उठाकर दिखा दिया कि उन्हें मौका मिला तो वे साबित कर देंगी कि हम किसी से कम नहीं'।


 

दो साल में तैयार हुई है बालिकाओं की यह हाकी टीम...

नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आइटीबीपी ने छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित इलाके से पहली बार 2 साल के अथक परिश्रम के बाद बालिकाओं की हॉकी टीम तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।

आईटीबीपी ने कोंडागांव जिले के मरदापाल के कन्या आश्रम में रहकर अध्ययन कर रही 42 जनजातीय छात्रायें, जिनकी उम्र 17 वर्ष से कम थी, को आईटीबीपी ने अपने स्तर पर हाकी का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया था।

अगस्त 2016 से लेकर अभी तक इस विद्यालय में पढ़ रही बालिकाएँ, जिनके पास खेलकूद से संबंधित कोई ज्ञान नहीं था और कोई प्रेरणा भी नहीं थी। आईटीबीपी ने उन्हें प्रेरित कर हॉकी के खेल में आगे बढ़ने के लिए तैयार किया।

बता दें कि मर्दापाल कन्या आश्रम में रह रही बालिकाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नक्सल हिंसा से ग्रसित परिवारों की बच्चियां हैं। इनमें से कई बच्चियों के परिवार अत्यंत गरीबी की दशा में जीवन यापन कर रहे हैं।

बालिकाओं को जूते के फीते तक बांधने नहीं आते थे..

इन बालिकाओं को शारीरिक अभ्यास, फिटनेस और खेल की प्रारंभिक बारीकियों से अवगत कराने के बाद धीरे-धीरे इन्हें हॉकी के मैदान पर उतारा गया। आइटीबीपी के हॉकी कोच हेड कांस्टेबल सूर्या स्मिथ जो स्वयं एक हॉकी के अच्छे खिलाड़ी हैं, उन्होंने बालिकाओं को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी।

आईटीबीपी की 41 वीं वाहिनी ने इन बालिकाओं को जूते, हॉकी स्टिक, जर्सी, गोल पोस्ट, गोलकीपर किट और हाकी से संबंधित अन्य सामान उपलब्ध कराया। जब इन बच्चियों को हॉकी के मैदान हेतु तैयार करना शुरू किया गया तब इन्हें जूते के फीते तक बांधने की जानकारी नहीं थी। धीरे धीरे इन्हें इस स्तर तक पहुंचा दिया गया कि अब छत्तीसगढ़ की बालिकाओं की टीम और अंडर-17 की टीमों में इन खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिल रहा है।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बच्चियों को दी प्रशिक्षण

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी इनमें से 6 बच्चियों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इन बालिकाओं ने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग ले कर यह साबित कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं हैं।

इन बालिकाओं को एस्ट्रो टर्फ पर भी खेलने का मौका भी आईटीबीपी ने अपने स्तर पर दिलाया है। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ से लगे इलाके में जहां सड़कों की स्थिति बहुत खराब है और कई स्थानों पर तो सड़क मार्ग उपलब्ध ही नहीं है, वहाँ इन बालिकाओं को घर से लाने और छोड़ने तक की ज़िम्मेदारी आईटीबीपी ने उठाई है।
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क्या कहते हैं आईटीबीपी के कोच...

हाकी टीम
चिकित्सा, शिक्षा और मुख्यधारा से जुड़े अन्य विकास कार्यों की घोर कमी वाले इस क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को हॉकी जैसे खेल में विकसित एवं प्रशिक्षित करने वाले कोच सूर्य स्मिथ कहते हैं कि बालिकाओं को आगे भी यू ही मौका मिला तो वे आसमान छू देंगी। आईटीबीपी ने नारी सशक्तिकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल की है।
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