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क्या बाकी देश से अलग है कल्लूरी का कानून?

Wed, 06 Apr 2016 02:03 PM IST
शुभ्रांशु चौधरी/ बीबीसी,बस्तर

सार

  • कल्लूरी के दंतेवाड़ा में रहते ताडमेटला की घटना हुई
  •  कल्लूरी के कारण बहुत से नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
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kalluri - फोटो : bbc
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विस्तार
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आज से एक साल पहले जब हमने सीजीनेट स्वर के दफ्तर को भोपाल से रायपुर शिफ्ट किया तो मैं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिला। सीजीनेट स्वर में हम दूर-दराज के इलाकों में आदिवासियों को यह सिखाते हैं कि वे मोबाइल की मदद से अपनी बोली में अपनी बात दुनिया से कैसे साझा कर सकते हैं।
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छत्तीसगढ़ पुलिस के रवैए से हमें बहुत परेशानी हुई थी इसलिए हम अपना दफ्तर छत्तीसगढ़ नहीं लाना चाहते थे। एक रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "कल्लूरी से आप लोगों को परेशानी होगी, बस्तर में वो आपको काम नहीं करने देंगे।" एसआरपी कल्लूरी बस्तर रेंज के आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) हैं।

माओवादियों पर अपनी किताब पर रिसर्च करते समय कल्लूरी से तब मैं पहली बार मिला था जब वे दंतेवाड़ा में नक्सल आपरेशन के प्रमुख थे। ललाट पर बड़ा-सा टीका और भरी गर्मी में गरम टोपी पहने हुए। उनके बारे में कहा जाता है कि वे जुनूनी हैं और किसी के बारे में अपनी पसंद-नापसंद खुलकर व्यक्त करते हैं।
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उनके दंतेवाड़ा में रहते ताडमेटला की घटना हुई 

जवान - फोटो : bbc
उनके दंतेवाड़ा में रहने के दौरान ताडमेटला की घटना हुई जिसमें कई गाँव जला दिए गए थे और घटना की जांच करने गए स्वामी अग्निवेश पर पुलिस के कुछ लोगों ने हमला किया था। उसके बाद कल्लूरी का तबादला कर दिया गया था। लेकिन थोड़े समय बाद ही कल्लूरी वापस बुला लिए गए।

उनके बारे में कहा जाता है कि वे अपने उच्च अधिकारियों की कम सुनते हैं और सीधे नेताओं से ही बातचीत करते हैं। बताया गया है कि उनके तबादले को रद्द कराने के लिए बस्तर के भाजपा नेताओं का बड़ा दल मुख्यमंत्री से मिलने गया था।

कल्लूरी के बारे में यह भी बताया जाता है कि वे बेहद सक्रिय अधिकारी हैं। नक्सल विरोधी अभियानों में खुद रात-रात भर पैदल चलकर हिस्सेदारी करते हैं और उत्तर छत्तीसगढ़ से नक्सल आन्दोलन को खत्म करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। 

कल्लूरी उस समय चर्चा में आए थे जब उनके खिलाफ बलात्कार का आरोप लगा था। लेदा नाम की एक महिला ने यह आरोप लगाया था कि कल्लूरी ने उनके नक्सली पति रमेश नगेसिया को आत्मसमर्पण करने के लिए बुलाया लेकिन उसे गोली मार दी और उसके बाद उनके साथ बलात्कार किया।हालांकि लेदा ने बाद में वह केस वापस ले लिया।

कल्लूरी ने सलवा जुडूम को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया था

महेंद्र कर्मा - फोटो : bbc
दंतेवाड़ा से वापस लौटकर कल्लूरी ने सलवा जुडूम के सूत्रधार महेंद्र कर्मा के बेटों के साथ सलवा जुडूम को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया, उनके साथ कई पत्रकार वार्ताएं कीं, पुराने अब सक्रिय न रहे सलवा जुडूम नेताओं से मिले, पर कांग्रेस हाईकमान के ऐतराज के बाद वह योजना कामयाब नहीं हो सकी। 

सलवा जुडूम को सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में गैर-कानूनी घोषित कर दिया था और महेंद्र कर्मा नक्सलियों के हमले में मारे गए थे।

महेंद्र कर्मा के प्रमुख सहयोगी अजय सिंह कहते हैं, "वे लोग हमारे पास आए थे पर हमने मना कर दिया। सलवा जुडूम से बहुत नुकसान हुआ है। हम जितने लोग इसमें जुड़े थे उसमें से हमारे जिले में चार ही बचे हैं। इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।"

कल्लूरी के कारण बहुत से नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

नक्‍सल - फोटो : BBC
उसके बाद कल्लूरी ने जगदलपुर के व्यापारी और ठेकेदार वर्ग को संगठित करने का काम शुरू किया है। अब वे वह सब कर रहे हैं जो कर्मा सलवा जुडूम के शुरु होने से पहले के दिनों में कर रहे थे।

इस बार संगठन का नाम 'सामाजिक एकता मंच' रखा गया है। बस्तर के कलेक्टर अमित कटारिया ने बताया, "कल्लूरी की सक्रियता के कारण बहुत से नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। अब हमें नक्सली गतिविधियों के बारे में सूचना मिलने लगी है और नक्सली बैकफुट पर हैं इसलिए श्री कल्लूरी को बेनिफिट ऑफ डाउट दिया जाना चाहिए।"

उन्होंने यह भी बताया, "कल्लूरी चाहते हैं कि सीआरपीएफ रोड बनवाने और उसकी सुरक्षा में मदद करे। सारे ऑपरेशन अब डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप)  ही करेगा। बस्तर में सीआरपीएफ का नया मजाकिया नाम सेन्ट्रल रोड प्रोटेक्शन फोर्स है।" 
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नए नेता हड़बड़ी में गलत हत्याएं कर रहे हैं

वुमेन - फोटो : BBC
डीआरजी स्थानीय युवाओं का वह समूह है जो गोंडी बोलता है स्थानीय इलाके को समझता है। इनमें से कई नक्सलियों के पूर्व सहयोगी रहे हैं। पिछले दिनों बस्तर से बलात्कार की जितनी खबरें आईं, सभी शिकायतों में एक बात समान थी कि आरोपी गोंडी में बात कर रहे थे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेता मनीष कुंजाम कहते हैं, "नक्सलियों में आंध्र के नेता धीरे-धीरे स्थानीय आदिवासी नेताओं को कमान सौंपकर पीछे हट रहे हैं, नए नेता हड़बड़ी में गलत हत्याएं कर रहे हैं, इन सब के कारण कल्लूरी की डीआरजी में काफ़ी स्थानीय युवा जुड़ रहे हैं जो प्रभावी हैं, पर सारे बलात्कार यही अर्धप्रशिक्षित लड़के कर रहे हैं।" 

बस्तर के एक डरे हुए पत्रकार जो अपना नाम नहीं बताना चाहते, कहते हैं, "यहाँ लड़ाई वामपंथी उग्रवाद और दक्षिणपंथी उग्रवाद के बीच ही है। इस लड़ाई में संघ और भाजपा के सिपाही कल्लूरी हैं, बाकी तो सब दर्शक हैं।"
(शुभ्रांशु चौधरी सीजीनेट स्वर के संस्थापक हैं)
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