दंतेवाड़ा जिला जैविक खेती के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है, लेकिन अब औद्योगिक अपशिष्ट को लेकर सवालों के घेरे में है। मसेनार गांव में मुख्य मार्ग के किनारे टेलिंग्स से भरे तीन हाइवा मिलने के बाद प्रशासन ने ArcelorMittal Nippon Steel India Limited को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीन दिनों के भीतर जवाब तलब किया गया है। यह कार्रवाई अमर उजाला के खुलासे के बाद की गई।
किरंदूल स्थित बेनिफिसिएशन प्लांट से निकलने वाले ठोस औद्योगिक अपशिष्ट को जिले में पांच अलग-अलग स्थानों पर लगभग 5.5 लाख मैट्रिक टन तक डंप करने की अनुमति दी गई थी। शर्त स्पष्ट थी—पहले से मौजूद गड्ढों को भरना। इनमें पातररास क्षेत्र में निजी भूमि पर दो लाख मैट्रिक टन और शेष करीब 3.5 लाख मैट्रिक टन चार अन्य स्थानों (तीन निजी, एक शासकीय) पर भरने की स्वीकृति है।
लेकिन मसेनार में सड़क किनारे बिना अनुमति 60 टन से अधिक टेलिंग्स पाए गए। नोटिस में कंपनी को निर्धारित अवधि में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिले में कंपनी को इस प्रकार का नोटिस पहली बार जारी हुआ है।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि जिन स्थलों पर डंपिंग की स्वीकृति दी गई, वहां कई जगह पहले से गड्ढे मौजूद नहीं थे। ठेकेदारों द्वारा समतल और उपजाऊ भूमि को 15–20 फीट तक खोदकर उसमें टेलिंग्स भरी जा रही है। कुछ स्थानों पर खुदाई के दौरान जलस्रोत निकलने की भी बात सामने आई, जिन्हें बाद में अपशिष्ट से पाट दिया गया।
पास के खेतों वाले किसान चिंतित हैं कि दर्जनों फीट खुदाई और कचरा भराव से न केवल जमीन बंजर हो रही है, बल्कि आसपास की उर्वरता पर भी असर पड़ रहा है। जिन भू-स्वामियों ने डंपिंग की सहमति दी है, उनके समीप छोटे किसानों की कृषि भूमि स्थित है, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है।
दंतेवाड़ा को जैविक खेती के लिए सराहना मिल चुकी है। कृषि विभाग किसानों को जैविक धान, फल और सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण देता रहा है। ऐसे में औद्योगिक अपशिष्ट का यह मामला जिले की जैविक पहचान पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। प्रशासन की नोटिस कार्रवाई के बाद ठेकेदारों में हलचल है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कंपनी के जवाब के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं या मामला कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।।