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शाम ढलते ही कोचियों का राज: भाटापारा में शराब माफिया बेलगाम, जनता हो रही परेशान; पुलिस नाकाम

Thu, 27 Mar 2025 01:21 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, भाटापारा, बलौदाबाजार

सार

भाटापारा विधानसभा क्षेत्र में अधिकृत शराब दुकानों से कहीं ज्यादा अवैध शराब विक्रेता (कोचिए) सक्रिय हैं। शाम होते ही यह अवैध कारोबार और तेज हो जाता है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई सिर्फ खुले में शराब पीने वालों तक सीमित रहती है।
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Police demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बलौदाबाजार-भाटापारा जिला आए दिन चर्चाओं में बना रहता है। खासकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ताजा मामला पलारी ब्लॉक से सामने आया है, जहां भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की गई।

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अब तक इस अवैध कारोबार के असली मालिक का कोई सुराग नहीं मिला है। इस मामले में अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस वाकई इस गोरखधंधे को जड़ से खत्म करने के लिए गंभीर है या फिर यह केवल दिखावटी कार्रवाई है?

चोरी और लूट के मामलों में भी पुलिस नाकाम
अवैध शराब के कारोबार के अलावा भाटापारा ग्रामीण क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी और लूटपाट की घटनाओं ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिमगा क्षेत्र के रोहरा गांव के पास एक व्यापारी से लूट का मामला सामने आया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी है।
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अवैध शराब माफियाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों की मानें तो भाटापारा विधानसभा क्षेत्र में अधिकृत शराब दुकानों से कहीं ज्यादा अवैध शराब विक्रेता (कोचिए) सक्रिय हैं। शाम होते ही यह अवैध कारोबार और तेज हो जाता है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई सिर्फ खुले में शराब पीने वालों तक सीमित रहती है। बड़े शराब माफियाओं पर कार्रवाई न होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल, जनता में आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। लोग मानते हैं कि या तो पुलिस प्रशासन इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाने में असमर्थ है या फिर कोई आंतरिक कारण कार्रवाई में बाधा बन रहा है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। क्या भाटापारा में कानून व्यवस्था की स्थिति सुधरेगी या फिर अवैध शराब और अपराध का यह खेल यूं ही चलता रहेगा? यह सवाल अब भी बना हुआ है।

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