महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राज्य महिला आयोग ने रायपुर संभाग के पांच जिलों के लिए महा जनसुनवाई आयोजित की। सुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया जिसने सभी का ध्यान खींचा। एक महिला ने शिकायत की कि उसके पति का एक किन्नर से संबंध है, जिसके कारण उसका पारिवारिक जीवन बिखर गया है। आयोग की समझाइश के दौरान पति ने पत्नी को भरण-पोषण के रूप में पांच लाख रुपये देने की सहमति जताई, लेकिन महिला इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुई और उसने पुलिस कार्रवाई की मांग की।
इस मामले में आयोग ने अगली सुनवाई में पति और दूसरे पक्ष की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए मुंगेली के पुलिस अधीक्षक को निर्देश जारी किए हैं। सुनवाई में कई अन्य पारिवारिक विवाद भी सामने आए। एक मामले में विधवा बहू और सास-ससुर के बीच चल रहे विवाद को देखते हुए आयोग ने प्रोटेक्शन ऑफिसर की निगरानी में एक वर्ष तक दोनों पक्षों की स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया। एक अन्य मामले में मां-बेटे के बीच मकान को लेकर विवाद था। आयोग ने स्पष्ट किया कि मकान और जमीन महिला के नाम पर होने के कारण उसे आजीवन उस घर में रहने का अधिकार है।
गरियाबंद जिले की एक पंचायत सचिव ने शिकायत की कि कुछ स्थानीय लोगों की शिकायतों के कारण उसके काम में बाधा आ रही थी। दोनों पक्षों की सहमति के बाद मामला सुलझ गया। वहीं एक अन्य मामले में महिला पर टोना-टोटका करने का आरोप लगाकर उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल किया गया था। आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए संबंधित लोगों को चेतावनी दी और पीड़ित महिला को कानूनी कार्रवाई का अधिकार बताया।
इस सुनवाई में कुल 292 प्रकरण सूचीबद्ध किए गए थे, जिनमें से कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। सुनवाई के दौरान घरेलू विवाद, संपत्ति विवाद, उत्पीड़न और पारिवारिक कलह से जुड़े मामले सामने आए। जनसुनवाई में रायपुर संभाग के जिलों से बड़ी संख्या में शिकायतें आईं। इनमें रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद से प्रकरण दर्ज किए गए थे। आयोग के अनुसार कई मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से समाधान किया गया, जबकि कुछ मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।