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Raipur: पुलिस लाइन परिसर में लावारिस मिलीं सैकड़ों पीपीई किट, कोरोना काल की आपूर्ति पर उठे गंभीर सवाल

Wed, 07 Jan 2026 03:12 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

राजधानी रायपुर के पुलिस लाइन क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब परिसर के भीतर बड़ी मात्रा में पीपीई किट बरामद की गईं।
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पुलिस लाइन परिसर में लावारिस मिलीं सैकड़ों पीपीई किट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी रायपुर के पुलिस लाइन क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब परिसर के भीतर बड़ी मात्रा में पीपीई किट बरामद की गईं। ये किटें पैकेट में बंद अवस्था में एक जगह इकट्ठा पड़ी मिलीं, जबकि कुछ किटों के जले हुए अवशेष भी नजर आए, जिससे उन्हें नष्ट करने की कोशिश की आशंका जताई जा रही है।
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प्रारंभिक आकलन के अनुसार, एक पीपीई किट की अनुमानित कीमत करीब 1800 रुपये बताई जा रही है। इस हिसाब से देखा जाए तो मामले में सरकारी संसाधनों को भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांच में सामने आया है कि बरामद पीपीई किट वर्ष 2020 की हैं, यानी उसी अवधि की जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था। उस समय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पीपीई किट की भारी कमी थी और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा उपकरणों के अभाव में काम करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही थी। ऐसे में अब वर्षों बाद इन किटों का इस हालत में मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।
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स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि ये पीपीई किट कोरोना काल में उपलब्ध थीं, तो इनका उपयोग क्यों नहीं किया गया। इसके साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि इन्हें खुले में फेंकने या जलाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया।

यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सामग्री प्रबंधन पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये किट किस विभाग के स्टॉक से संबंधित थीं और इन्हें पुलिस लाइन परिसर तक कैसे पहुंचाया गया।

कोरोना जैसी गंभीर महामारी के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली महत्वपूर्ण सुरक्षा सामग्री का इस तरह लावारिस हालत में मिलना, संसाधनों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गहन जांच की आवश्यकता को उजागर करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस मामले में जिम्मेदारी किस पर तय होती है।
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