जांजगीर जिले में जिला अस्पताल और आयुष्मान हॉस्पिटल पर नवजात की मौत के बाद लापरवाही और पैसे वसूलने का आरोप लगा है। पीड़ित का आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरती गई और नवजात की मौत छिपाकर उनसे पैसे वसूले गए।
जांजगीर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और संवेदनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। बसंतपुर निवासी जितेंद्र साहू ने जिला अस्पताल और आयुष्मान हॉस्पिटल के डॉक्टरों व स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि इलाज में लापरवाही बरती गई और नवजात की मौत छिपाकर उनसे पैसे वसूले गए।
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जितेंद्र ने बताया कि शनिवार रात दो बजे उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर वे जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने स्त्री रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया। इसके बाद वे पुराने जिला अस्पताल गए, जहां आंशिक प्रसव के बाद उन्हें चांपा के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया। वहां ऑपरेशन के जरिए बच्चे का जन्म हुआ।
नवजात को बार-बार हिचकी की शिकायत थी। डॉक्टरों ने सलाह दी कि बच्चे को जांजगीर के आयुष्मान हॉस्पिटल ले जाया जाए। वहां पहले आयुष्मान कार्ड से इलाज का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में नकद भुगतान की मांग की गई। जितेंद्र का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले 5,000 रुपये, फिर 10,000 रुपये लिए और बच्चे की स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं दी। जब उन्होंने नवजात को देखना चाहा तो पहले किसी अन्य बच्चे को दिखाया गया। बाद में बताया गया कि उनका बच्चा मर चुका है। शव सौंपने के लिए भी 6,000 रुपये की मांग की गई।
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डीएसपी कविता ठाकुर ने बताया कि पीड़ित पिता की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया। प्रशासन की अनुमति से शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आयुष्मान हॉस्पिटल के डॉ. आर.के. प्रसाद ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे की स्थिति के बारे में सही जानकारी दी गई थी और उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाने की सलाह भी दी गई थी।