कोंडागांव के फरसगांव ब्लॉक के हिर्री गांव में जन्मी योगिता ने सामाजिक चुनौतियों को पार करते हुए नेशनल लेवल पर जूडो में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मिली जानकारी के मुताबिक योगिता मुश्किल से चार साल की थी जब उसने अपने पिता मायाराम मंडावी और मां सुकमती मंडावी को खो दिया था। जनवरी 2021 में उसे जिला प्रशासन की मदद से कोंडागांव में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह में भर्ती कराया गया। इससे पहले योगिता चाचा और चाची की देखरेख में पली।
10 साल की उम्र में योगिता ने जूडो खेलना शुरू किया और जल्द ही उसने कमाल का टैलेंट दिखाया। एक साल के अंदर, उसने स्टेट लेवल पर मेडल जीतना शुरू कर दिया, जिससे एक होनहार खिलाड़ी के आने का संकेत मिला। उसकी तरक्की लगातार और शानदार रही है। 2024 में योगिता ने दुर्ग में स्टेट-लेवल स्कूल जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड और नासिक में खेलो इंडिया रीजनल कॉम्पिटिशन के साथ-साथ केरल में खेलो इंडिया नेशनल जूडो चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 2025 में उसने स्टेट-लेवल ओपन जूडो और स्कूल जूडो कॉम्पिटिशन में गोल्ड जीता। इसके अलावा हैदराबाद में नेशनल ओपन जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीता।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योगिता की सफलता को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सोर्स बताया। सीएम ने कहा की उनका सफर दिखाता है कि जब कड़ी मेहनत और अपने सपनों के प्रति पक्के इरादे के साथ काम किया जाए तो रिसोर्स की कमी सफलता में रुकावट नहीं बन सकती। योगिता की यह कामयाबी न सिर्फ़ छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश भर के चाइल्ड वेलफेयर इंस्टीट्यूशन में बड़े हो रहे बच्चों के लिए भी एक मज़बूत मैसेज है कि पक्के इरादे और डिसिप्लिन से, सबसे मुश्किल शुरुआत भी बड़ी मंज़िल तक पहुँच सकती है।