छत्तीसगढ़ के 79 कन्या आश्रम तथा छात्रावास में महिला अधीक्षक नहीं हैं। जबकि सरकारी रिकार्ड के अनुसार 27 में से 10 जिलों में छात्राओं के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा शारीरिक शोषण के मामले सामने आये हैं।
सीजी खबर के अनुसार छतीसगढ़ में 27 जिलों मे आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित 1226 आश्रम तथा 2026 छात्रावास संचालित हैं।
इनमें से 489 कन्या आश्रम तथा 746 कन्या छात्रावास हैं। 427 कन्या आश्रम तथा 729 कन्या छात्रावास में महिला अधीक्षक पदस्थ हैं। इस प्रकार से 62 कन्या आश्रम तथा 17 कन्या छत्रावास में महिला अधीक्षक पदस्थ नहीं हैं। कायदे से इन 79 कन्या आश्रमों में तथा छात्रावासों में महिला अधीक्षक होने चाहिये।
दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा शारीरिक शोषण
छत्तीसगढ़ के जशपुर में अनुसूचित जनजाति संयुक्त आश्रम गुतकिया के विकास खंड मनोरा में छात्रा के साथ बलात्कार की घटना घट चुकी है।
जिसमें महिला अधीक्षक के पति आरोपी हैं। उसी तरह से गरियाबंद के अनुसूचित जनजाति संयुक्त आश्रम, परसदा में आश्रम की नाबालिक छात्रा के साथ चौकीदार द्वारा अश्लील हरकत की घटना हुई थी। बलरामपुर के कन्या प्री मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली एक छात्रा के गर्भवती होने की घटना हो चुकी है।
15 आदिवासी छात्राओं के साथ दुष्कर्म
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति संयुक्त आश्रम, बैकुंठपुर में छात्रा के साथ अधीक्षक के रिश्तेदार ने अश्लील हरकत की थी।
बालोद के अनुसूचित जाति कन्या आश्रम, आमाडूला का वर्ष 2006 में शारीरिक शोषण किया गया था। कांकेर के अनुसूचित जाति कन्या आश्रम, झलियामारी में 15 आदिवासी छात्राओं के साथ 2013 में दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। जिसमें फास्टट्रैक कोर्ट ने 8 लोगों को कारावास की सजा सुनाई है।
रसोइए द्वारा छेड़छाड़
इसी तरह से महासमुंद के आदिवासी कन्या आश्रम, सागुनढ़ाप में रसोईया द्वारा छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटना घट चुकी है।
बीजापुर के आदिवासी कन्या आश्रम, भोपालपट्टनम में 2013-14 में शिक्षक पर छेड़छाड़ का आरोप है। जांजगीर जिले में प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास में महिला अधीक्षक के पति द्वारा 2013-14 में छेड़छाड़ की घटना हुई थी।
नारायणपुर जिले में विभाग द्वारा अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्था माता रुकमणि सेवा संस्थान, धनोरा में दो छात्राओं के साथ महिला अधीक्षक के पति ने छेड़छाड़ की थी।
गौरतलब है कि इन तमाम दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा शारीरिक शोषण के मामले में झलियामारी में 15 छात्राओं के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में 8 अभियुक्तो को सजा सुनाई गई है। कुल मिलाकर 10 दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा शारीरिक शोषण के मामले में से 1 में ही अदालती कार्यवाही के बाद सजा हुई है।
घटनाओं की पुनरावृति
यह देखा गया है कि कई मामलों में तो महिला अधीक्षक के पति, कर्मचारी या रिश्तेदार ही इन करतूतों में लिप्त पाये जाते हैं। जाहिर है कि आदिम जाति विभाग के छात्रावासों में रहने वाले छात्राओं के सुरक्षा देना इसी विभाग का काम है। ऐसे में यदि 10 में से केवल 1, झलियामारी दुष्कर्म की घटना में सजा होती है तो यह मानना चाहिये कि संपूर्ण व्यवस्था ही लचर हो गई है।
झलियामारी दुष्कर्म मामले में जल्द सजा होने का एक मुख्य कारण यह है कि इसके लिये फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर छत्तीसगढ़ सरकार बाकी के मामलों को भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में क्यों नहीं ले जाती है।