गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की पहली जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा बनी तो जिला पंचायत उपाध्यक्ष पद पर राजा उपेंद्र बहादुर हुए काबिज दोनों ने भाजपा के घोषित उम्मीदवारों को दी करारी शिकस्त हालांकि जीत के बाद दोनों प्रत्याशी जब भाजपा कार्यालय पहुचे तो, दोनों विजय प्रत्याशियों के पहुंचने के पूर्व ही जिला अध्यक्ष और मरवाही विधायक जिला कार्यालय से निकल गए। जीते हुए प्रत्याशी जरूर भाजपाई है पर उन्हें पार्टी ने अपना घोषित उमीदवार नही बनाया था।
इस हार पर प्रतिक्रिया देते हुए मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने बड़ा बयान देते हुए इसे कांग्रेस की जीत बताया है भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया यह है। वही विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब संगठन तय करेगा कि ऐसे लोगों पर क्या कार्रवाई की जाए। भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की हार से पार्टी में बौखलाहट देखी जा रही है। विधायक मरपच्ची ने यह कहते हुए गेंद संगठन के पाले में डाल दी है सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा अपने ही जीते हुए प्रत्याशियों के खिलाफ कोई कदम उठाएगी?ज्ञात होगी भाजपा ने अपने जिला पंचायत सदस्यों की सूची में राजा उपेंद्र बहादुर का नाम जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 5 से घोषित प्रत्याशी के रूप में जारी किया था जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की थी, वहीं क्षेत्र क्रमांक 1 से समीरा पैकरा विजयी हुई थी पर यहां भाजपा ने किसी को भी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया था वही यह जब चुनाव जीतने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा ने विधायक प्रणव मरपच्ची को माला पहनाने गई तो विधायक ने ना तो उनसे माला स्वीकार किया ना ही अभिनंदन का जवाब दिया जबकि जीत के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों भाजपा के जिला कार्यालय पहुंचे जहां उनका आतिशी स्वागत हुआ पर दोनों के जिला कार्यालय पहुंचते ही विधायक और जिला अध्यक्ष सहित पार्टी संगठन के कुछ लोग जिला कार्यालय से चलते बने, पर दोनों ही प्रत्याशी सीधे जिला अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचे जहां उनकी सीट खाली थी, ऐसे में यह तय है कि भाजपा दोनों को अपना सदस्य नहीं मानती जबकि दोनों खुद को भाजपा का ही सदस्य बता रहे हैं।