हथियार और गोला-बारूद बरामद
नक्सलवाद के विरुद्ध सरकारी पहल
हाल के दिनों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। 15 जनवरी को पड़ोसी बीजापुर जिले में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। वर्ष 2025 में राज्य में 1,500 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। केंद्र सरकार ने इस साल 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया है। इस दिशा में राज्य सरकार की पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
नक्सलियों का लाल आतंक मोहभंग के कारण
किस्टाराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में नवीन सुरक्षा कैम्पों की स्थापना, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादियों का स्वतंत्र विचरण क्षेत्र सिमट गया है। साथ ही, सुदूर अंचलों तक विकास योजनाओं और शासकीय सुविधाओं की पहुँच से स्थानीय जनता का भरोसा शासन-प्रशासन के प्रति मजबूत हुआ है, जिससे माओवादी संगठन में तेजी से मोहभंग बढ़ा है। यह आत्मसमर्पण इसी मोहभंग का परिणाम है।
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत नियमानुसार आर्थिक सहायता, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि वे शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जी सकें। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर ‘पूना मारगेम’अभियान के तहत आत्मसमर्पण करें, क्योंकि यह अभियान उन्हें सुरक्षित भविष्य और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर प्रदान करता है।