एसईसीएल की मानिकपुर कोल परियोजना में विरोध की आग एक बार फिर से भड़क गई है। प्रबंधन के खिलाफ ग्राम दादाखुर्द के ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन ने पहले ही जिन ग्रामीणों की जमीन ली थी, उन्हें न तो मुआवजा दिया है और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की है। ऐसे में नए सिरे से कई किसानों के खेतों में मिट्टी फीलिंग का कार्य कराया जा रहा है, जो सर्वथा अनुचित है।
कृषि कल्याण परिषद्ब के सदस्य अमन पटेल ने बताया कि एसईसीएल ग्रामीणों के साथ हमेशा से छल करती आ रही है। एसईसीएल के द्वारा दादर बस्ती के पास कोयला साइडिंग का निर्माण कर रही है जो अनुचित है, जिस कंपनी को काम दिया गया है वो बाहर से मजदूर लेकर आई है। स्थानीय लोगों को काम नहीं दिया जा रहा है, जबकि जमीन उनकी गई है एसईसीएल के द्वारा बेरोजगारों को नौकरी देने की बात कही थी, लेकिन अब वह अपनी बातों से मुकर रही है, जिसे लेकर सभी ग्रामीण आंदोलन पर उतर आए हैं। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक वह वह आंदोलन जारी रखेंगे।
ग्रामीणों की माने तो प्रबंधन गांव के करीब 20 किसानों के खेतों में बिना सूचना दिए मिट्टी फीलिंग का कार्य करवा रहा था। इस बात की जानकारी होने पर ग्रामीण एकजुट हुए और प्रबंधन की खिलाफ करते हुए खदान के भीतर प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल ने पुराने प्रकरणों का निराकरण अब तक नहीं किया है ऐसे में नए जमीन को किस आधार पर लिया जा रहा है यह समझ से परे है।
ग्रामीणों के प्रदर्शन को देखते हुए एसईसीएल मानिकपुर एरिया के उपमहाप्रबंधक अजय तिवारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बात करनी चाही लेकिन बातचीत विफल साबित हुई। उप महाप्रबंधक अजय तिवारी ने बताया की जिस जमीन को लेकर विवाद हो रहा है उसका निपटारा जब तक नहीं हो जाता तब तक काम बंद किया जाता है। प्रशासन द्वारा विवाद का निपटारा करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरु की जाएगी।
ग्राम दादरखुर्द के ग्रामीणों की एसईसीएल के खिलाफ लड़ाई पिछले लंबे समय से जारी है। खदान विस्तार के लिए जिन ग्रामीणों ने जमीन दी उन्हें न तो नौकरी मिली और न ही मुआवजा। बावजूद इसके प्रबंधन एक बार फिर से ग्रामीणों की जमीन लेने की फिराक में जुट गया है। ग्रामीणों के विरोध के बाद एसईसीएल ने काम रोक दिया है।