बालोद के गुरूर ब्लॉक के बोडरा गांव में समय पर मुनादी नहीं होने से किसान चक्रवात की चेतावनी से अनजान रहे। तेज बारिश में पकी धान की फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने मुआवजे और कोटवार पर कार्रवाई की मांग की है।
बालोद जिले में चक्रवात 'अर्नब' को लेकर बालोद जिला प्रशासन के हाई अलर्ट के बावजूद मैदानी स्तर पर लापरवाही सामने आई है। गुरूर विकासखंड के ग्राम बोडरा में किसानों की पकी धान की फसल बर्बाद हो गई। कोटवार द्वारा समय पर मुनादी न कराने से यह नुकसान हुआ।
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ग्रामीणों को आगामी भारी बारिश और तूफान की पूर्व सूचना नहीं मिल सकी। बेखबर किसानों ने अपनी पकी धान की फसल काट दी थी। तेज बारिश के चलते यह फसल खेतों में जलमग्न होकर पूरी तरह बर्बाद हो गई। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत सभी ग्रामीण प्रशासनिक इकाइयों को सक्रिय किया था। समय रहते मुनादी कराने के सख्त निर्देश भी दिए गए थे। इसका उद्देश्य संभावित नुकसान से बचना था। इसके विपरीत, बोडरा गांव में कोई चेतावनी जारी नहीं की गई। आक्रोशित किसानों ने जनपद उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू से इसकी शिकायत की।
कोटवार की लापरवाही
पूछताछ के दौरान कोटवार ने अपनी तबीयत खराब होने का हवाला दिया। जनपद उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने गुरूर तहसील और जनपद पंचायत कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। साहू ने कहा कि यदि कोटवार अस्वस्थ था, तो आपात स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी। ग्रामीण मौसम और सरकारी सूचनाओं के लिए मुख्य रूप से कोटवार की मुनादी पर ही निर्भर रहते हैं।
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मुआवजे और कार्रवाई की मांग
जनपद उपाध्यक्ष ने प्रशासन से किसानों को हुए भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई की मांग की है। उन्होंने त्वरित सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देने को कहा। दुर्गानंद साहू ने कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने वाले कोटवार के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।