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डिजिटल क्रॉप सर्वे की कलेक्टर ने की जांच: 531 गांवों में चल रहा खेत-खसरा का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम

Sat, 29 Aug 2026 04:04 PM IST
धमतरी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी

सार

जिले में किसानों की जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करने के लिए चल रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे का कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया।
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कलेक्टर ने किया डिजिटल क्रॉप सर्वे का निरीक्षण
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विस्तार
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धमतरी जिले में किसानों की जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करने के लिए चल रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे का कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। तहसील कुकरेल के ग्राम बनबगौद में उन्होंने मोबाइल एप के जरिए हो रहे खसरा-वार सर्वे की प्रक्रिया देखी और अधिकारियों-कर्मचारियों से फील्ड में आ रही तकनीकी व व्यावहारिक परेशानियों की जानकारी ली।
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निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और सर्वेयर से सर्वे की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि चयनित सभी खसरों का शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित डिजिटल सर्वे पूरा किया जाए। खेत में दर्ज फसल की वास्तविक स्थिति का मौके पर सत्यापन करने के साथ फोटो भी सही तरीके से अपलोड करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया।

कलेक्टर ने कहा कि पटवारी स्तर पर अनुमोदन से पहले सर्वे में दर्ज फसल, रकबा और फोटो का राजस्व रिकॉर्ड से मिलान अनिवार्य रूप से किया जाए। किसी भी तरह की गलत जानकारी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को पिछले वर्ष सामने आई विसंगतियों का विश्लेषण कर इस बार उनकी पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश भी दिए।
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531 गांवों में हो रहा सर्वे
जिले के 645 गांवों में से 531 गांवों को डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए चुना गया है। इन गांवों में 17 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक खसरा-वार फसल और भूमि की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। चयनित गांवों में कुल 5 लाख 22 हजार 808 खसरे दर्ज हैं। इनमें अब तक 1 लाख 26 हजार 269 खसरों का सर्वे पूरा किया जा चुका है, जबकि 17 हजार 961 खसरों का पटवारी स्तर पर अनुमोदन भी हो चुका है। शेष खसरों के सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान का काम जारी है।

फसल से लेकर सिंचाई तक की जानकारी होगी डिजिटल
सर्वे के दौरान खेत में बोई गई फसल, उसका रकबा, पड़त भूमि, कृषि के लिए अनुपयुक्त जमीन, सिंचाई के साधन और भूमिधारक से जुड़ी आवश्यक जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जा रही है। इससे खेत स्तर की वास्तविक स्थिति का प्रमाणिक और अद्यतन रिकॉर्ड तैयार होगा। इस डिजिटल डेटा से प्रशासन को कृषि उत्पादन का अनुमान लगाने, फसलवार योजना तैयार करने, सिंचित-असिंचित क्षेत्र का आकलन करने और किसानों से जुड़ी विभिन्न शासकीय योजनाओं की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

तकनीकी दिक्कतों के समाधान और सुरक्षा पर भी जोर
कलेक्टर ने सर्वे के दौरान सामने आ रही तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक पत्राचार करने के निर्देश दिए। बारिश के मौसम को देखते हुए उन्होंने फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखने को कहा। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 30 सितंबर तक 531 चयनित गांवों में सर्वे और अनुमोदन का काम निर्धारित गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि जिले में कृषि और राजस्व व्यवस्था के लिए विश्वसनीय डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके।

 

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