फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanker: करोड़ों खर्च के बाद भी जामगांव-नरहरपुर सड़क बनी हादसों का जंजाल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

Thu, 18 Sep 2025 10:41 AM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर

सार

आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और भ्रष्टाचार ने पूरे काम को खोखला कर दिया। महज एक साल में सड़क का इस तरह जर्जर हो जाना कहीं न कहीं इंजीनियरिंग और निगरानी दोनों की नाकामी को दर्शाता है। बरसात ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
 
विज्ञापन
करोड़ों खर्च के बाद भी जामगांव-नरहरपुर सड़क बनी हादसों का जंजाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सड़कों की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। करोड़ों की लागत से बनी कांकेर जिले के जामगांव-नरहरपुर सड़क महज एक साल में ही उखड़ने लगी है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, टूटी सतह और कीचड़ से लबालब हिस्से न सिर्फ राहगीरों की परेशानी बढ़ा रहे हैं बल्कि उनकी जान के लिए भी खतरा बन गए हैं।
विज्ञापन


ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब यह चलने लायक भी नहीं रह गई। बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। वहीं किसान अपनी उपज को बाजार तक ले जाने में असमर्थ हैं। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर हादसों का शिकार हो रहे हैं और पैदल चलने वाले भी जोखिम उठाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और भ्रष्टाचार ने पूरे काम को खोखला कर दिया। महज एक साल में सड़क का इस तरह जर्जर हो जाना कहीं न कहीं इंजीनियरिंग और निगरानी दोनों की नाकामी को दर्शाता है। बरसात ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
विज्ञापन


जन आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कह दिया है कि यदि लोक निर्माण विभाग ने तत्काल संज्ञान लेकर सड़क की मरम्मत नहीं की, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को यूं बर्बाद करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है, वरना लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों को राजनीतिक संरक्षण मिलने का संदेश जाएगा।

जिम्मेदारी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस बदहाल सड़क का जिम्मेदार कौन है? करोड़ों की लागत से बना यह मार्ग साल भर भी नहीं टिक पाया। अब ग्रामीण जानना चाहते हैं कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें