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'मुझे याद नहीं कितनी बार मुझसे रेप हुआ'

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मैं अपनी जिंदगी के वो डरावने चार महीने कभी नहीं भूल सकती जब मेरे भाई ने मुझे बेच दिया और मेरे साथ रोजाना बलात्कार किया जाता था। लोग रोज मेरी आबरू से खेलते और मैं हाथ जोड़कर उनके आगे गिड़गिड़ाती रही। यह कहते कहते बचपन बचाओ आंदोलन के ऑफिस में बैठी 23 वर्षीय युवती की आखों में फिर आंसु आ गए।
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अंग्रेजी अखबार मेल टुडे की खबर के अनुसार छत्तीसगढ़ निवासी युवती को उसका चचेरा भाई झारखंड के गुमला जिले से होते हुए बीते साल जसपुर घुमाने के लिए लाया था। लेकिन युवती के लिए यह खुशनुमा यात्रा जल्द ही बुरे सपने में बदल गई।

झारखंड के गुमला में उसके भाई ने उसे रोहित नाम के आदमी को पैसों के लिए बेच दिया। जिसके बाद उससे रोहित ने बलात्कार किया और अन्य कई लोगों ने भी उससे गैंगरेप कर उसका शोषण किया।
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रोज होता था गैंगरेप

युवती पर अत्याचारों की इंतहा इस कदर हुई कि उसके शरीर पर ब्लेड और बेल्ट से मार के निशान खुद ही इसकी गवाही दे देते हैं। वो कहती है कि मुझे याद भी नहीं कि मेरे साथ कितनी बार बलात्कार किया गया।

एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्य उसे थाने से लेकर आए और उसकी मदद की। एनजीओ के प्रोजक्ट डायरेक्टर राकेश सेंगर बताते हैं कि युवती ने सीएम-पीएम से लेकर हर उस अधिकारी और संस्‍था को चिट्ठी लिखी जो उसे बचा सकते थे लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।

गुमला से उसे दिल्‍ली लाने के बाद निहाल विहार स्थित एक प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर दिया गया, जहां उसका इस्तेमाल यौन शोषण और बलात्कार के लिए होता था। जिस प्लेसमेंट एजेंसी ने उसे रखा उसने कभी उसे कहीं नौकरी के लिए नहीं भेजा।

मां बाप ने जमीन-गहने बेचकर छुड़ाया बेटी को

युवती के अनुसार उन्होंने मुझे बताया कि वो उसे खुद के इस्तेमाल के लिए लाए हैं। वह मुझे काम के लिए भेजते थे लेकिन अपना कमीशन मिलते ही फिर वापस बुला लेते। उसने बताया कि रोहित रोज उससे बलात्कार करता और उसके दोस्त भी इस अपराध में शामिल होते। वो मुझसे पैसा कमाना चाहते थे।

कई महीनों बाद मेरे माता पिता ने चचेरे भाई को पकड़ा और उससे पूछताछ की। इसकी सूचना किसी ने रोहित और उसके दोस्तों को दे दी जिन्होंने मुझे धमकाया कि अगर मैंने इस बारे में अपने माता पिता के सामने मुंह खोला तो वो मेरे परिजनों को जिंदा जला देंगे।

इसके बाद वो उसे लेकर छत्‍तीसगढ़ पहुंचे तो उन्होंने मुझे छोड़ने के ‌लिए मेरे घरवालों से तीस हजार रुपये की मांग की। युवती ने बताया कि मेरे किसान पिता ने मुझे छुड़ाने के लिए अपनी कुछ जमीन और मेरी मां ने अपने जेवर बेच दिए।
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पैसे की तंगी होने पर आरोपियों ने फिर किया अपहरण

मेरे पिता ने बड़ी कीमत चुकाकर मुझे उन लोगों से बचाया। लेकिन शायद यही मेरे दुखों का अंत नहीं था। साल 2015 रोहित और उसके दोस्तों ने उस समय उसका घर से उस समय अपहरण कर लिया जब वह अकेली थी।

उनके पास पैसों की कमी होने लगी तो उन्होंने मेरा दोबारा अपहरण कर लिया। इस बार उन्होंने नया प्लान बनाया। वो चाहते थे कि मैं उनके लिए लोगों को फंसाऊं और पैसे लाकर दूं। इसके लिए उन्होंने पूरी प्लानिंग की और मुझे एक घर में घरेलू नौकरानी के तौर पर भेज दिया।

इसके बाद उन्होंने मुझसे बलात्कार के आरोप लगाने के लिए कहा जिससे मैने इंकार कर दिया। आखिरकार उसने अपने घर भागने का फैसला किया और वो छत्‍तीसगढ़ अपने माता पिता के पास पहुंच गई।

उसने बताया कि इस सबके बारे में उसने छत्‍तीसगढ़ और दिल्‍ली के मुख्यमंत्रियों, राष्ट्रीय महिला आयोग और ‌दिल्‍ली पुलिस सबको पत्र लिखे लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। युवती फिलहाल बचपन बचाओ आंदोलन के साथ रह रही है।
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