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संविदा महिला कर्मचारियों को भी मिलेगा 180 दिन का मातृत्व अवकाश: हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश भी किया निरस्त

Thu, 22 Oct 2026 07:36 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए संविदा महिला कर्मचारियों को भी 180 दिन के सवेतन मातृत्व अवकाश का अधिकार दिया है। कोर्ट ने महिला डॉक्टर की बर्खास्तगी रद्द कर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सभी मातृत्व लाभ देने के निर्देश दिए।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने संविदा कर्मचारियों के मातृत्व लाभ से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को भी 180 दिन का मातृत्व अवकाश पाने का पूरा कानूनी अधिकार है, भले ही उनकी संविदा की अवधि या सेवाकाल समाप्त हो रहा हो।
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मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और न्यायाधीश संतोष शर्मा की युगल पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए याचिका खारिज करने संबंधी एकल पीठ के पूर्व आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता महिला डॉक्टर को 180 दिन का सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान करने और उनके खिलाफ जारी बर्खास्तगी आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्देश दिया है।

बर्खास्तगी का नोटिस और कॉलेज का तर्क
संविदा नियुक्ति से जुड़े इस मामले की पृष्ठभूमि कोरबा स्थित बिसाहूदास महंत मेमोरियल सरकारी मेडिकल कॉलेज की है। यहां प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में संविदा सहायक प्रोफेसर के पद पर डॉ. निकिता श्रीवास्तव की नियुक्ति 16 नवंबर, 2022 को की गई थी। सेवा में रहते हुए जब वह गर्भवती हुईं, तो उन्होंने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत 31 जुलाई, 2026 को आवेदन प्रस्तुत किया। इस आवेदन में उन्होंने 1 अगस्त, 2026 से लेकर 28 जनवरी, 2027 तक कुल 180 दिनों के सवेतन मातृत्व अवकाश की मांग की थी। विभाग के विभागाध्यक्ष ने 3 अगस्त, 2026 को यह आवेदन स्वीकृति हेतु कॉलेज के डीन के पास भेज दिया था।
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हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने महिला डॉक्टर के इस आवेदन पर अवकाश स्वीकृत करने के बजाय 6 अगस्त. 2026 को उन्हें एक महीने का बर्खास्तगी नोटिस थमा दिया। प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि उक्त पद पर नियमित चिकित्सक डॉ. शीला वर्मा की नियुक्ति 25 जून, 2026 को पहले ही हो चुकी है। ऐसे में संविदा सेवा स्वतः ही समाप्त मानी जाएगी और उन्हें अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता।

एकल पीठ से खंडपीठ तक पहुंचा मामला
कॉलेज प्रशासन के इस रवैये और बर्खास्तगी नोटिस के विरोध में डॉ. निकिता श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी। हालांकि, एकल पीठ ने 8 सितंबर को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद इस फैसले को चुनौती देते हुए महिला डॉक्टर ने उच्च न्यायालय की युगल पीठ के समक्ष अपील प्रस्तुत की।

अपील की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'डॉ. कविता यादव विरुद्ध सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय' प्रकरण में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया था कि संविदा अवधि समाप्त होने के पश्चात भी मातृत्व लाभ की निर्धारित अवधि प्रभावी रह सकती है और महिला कर्मचारी को इससे वंचित नहीं किया जा सकता।

बर्खास्तगी नोटिस गैरकानूनी
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि भले ही नियमित डॉक्टर ने 25 जून, 2026 को कार्यभार संभाल लिया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने उसके बाद भी डॉ. निकिता श्रीवास्तव को निरंतर सेवा में बनाए रखा। जब उन्होंने 31 जुलाई, 2026 को मातृत्व अवकाश हेतु आवेदन किया था, तब वह सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रही थीं।

अदालत ने एकल पीठ के 8 सितंबर, 2026 के फैसले और मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा 6 अगस्त, 2026 को जारी किए गए बर्खास्तगी नोटिस को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया। न्यायालय ने आदेश जारी किया कि याचिकाकर्ता को उनके आवेदन की तिथि से पूरे 180 दिनों का मातृत्व अवकाश और संबंधित अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी वित्तीय एवं अन्य मातृत्व लाभ प्रदान किए जाएं।
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