बस्तर के आलनार गांव का रहने वाला राजू इच्छाम इन दिनों अपने गले में अपना वोटर आईकार्ड लटका कर घूम रहा है, मगर इस बात की पक्की गारंटी नहीं है कि वह लोकतंत्र के अपने इस सबसे बड़े अधिकार का इस्तेमाल कर ही पाएगा।
दंतेवाड़ा से कोई बीस किमी दूर मिले इस युवक ने बताया कि यह कार्ड उसने अपनी सुरक्षा के लिए लटका रखा है, ताकि सुरक्षा बल उसे नाहक परेशान न करें। उसके चेहरे पर एक तरह का खौफ नजर आता है।
उससे जब इस संवादताता ने बात करने की कोशिश की तो उसने पहले तो सुरक्षा कर्मी समझा और झट से उसने अपना आई कार्ड दिखाने लगा। उसके बाद उसे लगा कि यह संवाददाता किसी पार्टी का सदस्य है, तो उसने कहा आप जिसमें कहेंगे उसी में वोट दे देंगे।
राजू इच्छाम ही नहीं, इस क्षेत्र के किसी भी शख्स से बात करें तो उसका जवाब सवाल पूछने वाले की सुविधा के अनुरूप ही होता है, बशर्ते की आप उससे संवाद कर पाएं।
कम दर्द नहीं है बस्तर में
छत्तीसगढ़ में तैनात अर्ध सैनिक बलों को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं कि इनके जवान स्थानीय आदिवासियों के साथ ज्यादती करते हैं। ऐसे मामले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी उठाए हैं।
लगातार अर्ध सैनिकों के जवानों के खिलाफ गांव के लोगों के साथ मारपीट, यौन दुर्व्यहार के मामले थाने और अदालत तक पहुंचे हैं।
हालत यह है कि 11 नवंबर को होने वाले मतदान से ऐन पहले प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रामनिवास की ओर से स्थानीय अखबारों में बकायदा बाहर से आए बलों से अपील करता हुआ इश्तहार दिया गया है।
इसका मजमून कुछ इस तरह है, प्रिय बंधु औं आपका छत्तीसगढ़ राज्य में हार्दिक स्वागत करता हूं एवं आशा करता हूं कि आपका छत्तीसगढ़ प्रवास सुखद होगा। विधानसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र का पुनीत एवं पावन अवसर है।
आप सौभाग्यशाली हैं कि लोकतंत्र की महान परंपरा तो बरकरार रखने के लिए आपको चुना गया है। भारत वर्ष के कठिन क्षेत्रों में आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव सुरक्षा सुरक्षा बलों की महती जिम्मेदारी है।
सुरक्षा संबंधी निर्देशों तथा आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन उत्तम व्यवस्था हेतु आवश्यक है। ' इश्तहार में वे आगे लिखते हैं, 'छत्तीसगढ़ विविध संस्कृति वाला प्रदेश है। यहां के निवासी सीधे-सादे तथा सज्जन प्रवृत्ति के हैं।
छत्तीसगढ़ के निवासी अपनी संस्कृति के प्रति गर्व महसूस करते हुए उसे संरक्षित रखने में विश्वास रखते हैं। मुझे विश्वास है कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान आप छत्तीसगढ़ की संस्कृति का सम्मान करेंगे। ...'
यहां दस राज्यों से आए सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आरपीएफ,एसएसबी सहित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवानों को तैनात किया गया है।
इनमें से कई तो 25 मई की झीरम घाटी के हमले के बाद यहां आए हैं और पिछले पांच महीने से अपने घर नहीं गए हैं।
इन जवानों का अपना दर्द है। उनमें से कई ने अमर उजाला से इसका साझा किया। मसलन इलाहाबाद के रहने वाले एक जवान ने कहा, आप देख ही रहे हैं कि यहां तो मोबाइल फोन का सिग्नल तक नहीं मिलता!