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सीएम ग्रामीण बस योजना का 1 वर्ष : 850 गांवों में पहली बार पहुंची नियमित बस सेवा, एक साल में 24 लाख किमी का सफर

Sat, 03 Oct 2026 07:32 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के एक साल में 850 गांवों तक नियमित बस सेवा पहुंची। 13 जिलों में 107 बसें चल रहीं, जबकि दूसरे चरण में 4,368 गांवों को जोड़ने की तैयारी है।
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सीएम ग्रामीण बस योजना का एक वर्ष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने एक साल का सफर पूरा कर लिया है। योजना के तहत बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 107 बसें 106 मार्गों पर संचालित हो रही हैं। इसके जरिए उन 850 गांवों में नियमित बस सेवा शुरू हुई है, जहां पहले यात्री बसों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
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4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के तहत एक साल में बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। फिलहाल बसें प्रतिदिन लगभग 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। इससे ग्रामीणों के लिए स्कूल, अस्पताल, हाट-बाजार, विकासखंड और जिला मुख्यालय तक पहुंचना आसान हुआ है।

34 बसों से शुरू हुआ सफर, अब 107 बसें सड़कों पर
योजना की शुरुआत 34 मार्गों पर 34 बसों के संचालन और करीब 250 गांवों को जोड़ने के साथ हुई थी। एक साल के भीतर इसका दायरा बढ़कर 106 मार्गों और 107 बसों तक पहुंच गया है। वर्तमान में अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई लगभग 5,300 किलोमीटर है। मार्गों की दूरी 14 से 105 किलोमीटर तक है और ज्यादातर पर रोजाना दो ट्रिप संचालित की जा रही हैं।
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बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें और सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें चल रही हैं। जिलेवार देखें तो सुकमा में 9, दंतेवाड़ा में 7, बीजापुर में 11, नारायणपुर में 4, बस्तर में 5, कांकेर में 12 और कोंडागांव में 9 बसें संचालित हैं। वहीं सरगुजा जिले में 8, सूरजपुर में 9, बलरामपुर में 7, जशपुर में 16, कोरिया में 6 और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 4 बसें ग्रामीण मार्गों पर सेवाएं दे रही हैं।

पिकअप और मालवाहक वाहनों पर निर्भरता हुई कम
बस्तर और सरगुजा के कई दूरस्थ गांवों में नियमित यात्री बसें नहीं पहुंचती थीं। ऐसे में ग्रामीणों को सफर के लिए पिकअप और दूसरे मालवाहक वाहनों का सहारा लेना पड़ता था। इस तरह की यात्रा महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए मुश्किल होती थी। कम यात्री संख्या और दुर्गम रास्तों के कारण निजी बस संचालकों के लिए इन मार्गों पर नियमित सेवा देना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। योजना के जरिए सरकार ने वित्तीय सहायता का प्रावधान कर इन इलाकों में बस संचालन को संभव बनाया है।

कोंटा-जगरगुंडा मार्ग पर ग्रामीणों को मिली राहत
सुकमा जिले में कोंटा से जगरगुंडा के बीच लगभग 83 किलोमीटर लंबे मार्ग पर बस सेवा शुरू होने से स्थानीय लोगों को आवागमन का नियमित साधन मिला है। जून 2026 में किए गए फील्ड आकलन के मुताबिक, इस मार्ग पर विद्यार्थी स्कूल पहुंचने, मरीज स्वास्थ्य केंद्र जाने और महिलाओं को बच्चों के साथ सफर करने में सुविधा महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण आम, महुआ, मुर्गी और अन्य वनोपज लेकर हाट-बाजार तक पहुंच पा रहे हैं और उसी दिन अपने गांव लौटने का विकल्प भी मिल रहा है। रोजगार के लिए यात्रा करने वाले मजदूरों और युवाओं को भी नियमित बस सेवा से सहूलियत हुई है।

गांवों और बाजारों के बीच बढ़ा संपर्क
बस सेवा से केवल लोगों का आवागमन ही आसान नहीं हुआ है, बल्कि ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी मदद मिल रही है। ग्रामीण अपनी उपज और वनोपज हाट-बाजार में बेचने ले जा रहे हैं, जबकि बाजार से जरूरी सामान गांवों तक पहुंचाना भी सुविधाजनक हुआ है। नियमित परिवहन से गांवों का विकासखंड और जिला मुख्यालयों से संपर्क बढ़ा है। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और स्थानीय व्यापार जैसी गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। कुछ मार्गों पर स्थित सुरक्षा बलों के कैंपों में तैनात जवानों को भी बस सेवा का लाभ मिल रहा है।

बस संचालकों को 5.77 करोड़ रुपये की सहायता
कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर बस संचालन को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार निजी संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दे रही है। योजना के तहत पहले वर्ष में 26 रुपये, दूसरे वर्ष में 24 रुपये और तीसरे वर्ष में 22 रुपये प्रति किलोमीटर सहायता का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम तीन साल तक दी जाती है। इसके अलावा योजना के तहत संचालित बसों को अधिकतम तीन वर्ष तक मासिक मोटरयान कर में छूट भी दी जाती है। अब तक 107 बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। बसों का स्वामित्व और संचालन निजी संचालकों के पास रहता है, जबकि सरकार निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराती है।

GPS से निगरानी, वास्तविक दूरी के आधार पर भुगतान
योजना में बसों की आवाजाही पर निगरानी रखने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) का उपयोग किया जा रहा है। MMGBY पोर्टल के माध्यम से बसों की लोकेशन, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी देखी जा सकती है। संचालकों को मिलने वाली वित्तीय सहायता का भुगतान अधिसूचित मार्ग पर वास्तव में तय की गई दूरी के आधार पर किया जाता है। इसके लिए ऑनलाइन VLTD रिपोर्ट की जांच क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों द्वारा की जाती है। यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की समय-सारिणी बस संगवारी ऐप पर भी उपलब्ध कराई गई है।

दूसरे चरण में 4,368 गांवों को जोड़ने की तैयारी
योजना का विस्तार अब आठ और जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों तक करने की तैयारी है। दूसरे चरण में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बालोद, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और धमतरी को शामिल किया गया है। इन जिलों के 85 आदिवासी विकासखंडों में बस सुविधा से वंचित 4,368 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे करीब 14.57 लाख लोगों को लाभ मिलने की संभावना है। इस चरण में 60 से 80 बसें संचालित करने का प्रस्ताव है। बस किराए के भुगतान के लिए UPI और QR कोड की सुविधा शुरू करने की योजना भी बनाई जा रही है।

दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को किराए में छूट
योजना के तहत दृष्टिबाधित, बौद्धिक दिव्यांगता वाले, दोनों पैरों से चलने में असमर्थ व्यक्तियों, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और HIV/AIDS से प्रभावित व्यक्तियों को सहायक सहित किराए में 100 प्रतिशत छूट दी जाती है। वहीं, कलेक्टर से प्रमाणित नक्सल प्रभावित व्यक्तियों को किराए में 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दूरस्थ गांवों तक सुरक्षित और सुलभ परिवहन पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। योजना के विस्तार के जरिए अधिक से अधिक बस सुविधा विहीन गांवों को नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने का लक्ष्य है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंचने में दूरी बाधा न बने।
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