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CG News: चिरायु योजना से बदली नन्हे विक्रम की जिंदगी, जन्मजात समस्या के ऑपरेशन के बाद लौटी मुस्कान

Tue, 10 Mar 2026 04:44 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

बस्तर जिले के सुदूर वनांचल में बसे तारागांव के 6 वर्षीय बालक विक्रम कश्यप की जिंदगी में अब नई खुशियां लौट आई हैं। जन्म से कटे होंठ और तालु की समस्या से जूझ रहे विक्रम का सफल ऑपरेशन होने के बाद अब वह सामान्य बच्चों की तरह बोलने और मुस्कुराने लगा है।
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जन्मजात समस्या के ऑपरेशन के बाद लौटी मुस्कान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बस्तर जिले के सुदूर वनांचल में बसे तारागांव के 6 वर्षीय बालक विक्रम कश्यप की जिंदगी में अब नई खुशियां लौट आई हैं। जन्म से कटे होंठ और तालु की समस्या से जूझ रहे विक्रम का सफल ऑपरेशन होने के बाद अब वह सामान्य बच्चों की तरह बोलने और मुस्कुराने लगा है।
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मजदूर परिवार में जन्मे विक्रम के लिए बचपन आसान नहीं था। जन्मजात क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट की वजह से उसे भोजन करने और स्पष्ट बोलने में काफी दिक्कत होती थी। शारीरिक परेशानी के साथ-साथ गांव के माहौल और बच्चों के बीच झिझक के कारण वह अक्सर खुद को दूसरों से अलग महसूस करता था और अपना चेहरा छिपाकर रहता था।

विक्रम की जिंदगी में बदलाव तब आया जब स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम आंगनवाड़ी जांच के दौरान तारागांव पहुंची। जांच के दौरान टीम ने विक्रम की स्थिति को पहचाना और उसके पिता नरसिंग कश्यप को इलाज के लिए प्रेरित किया। शुरू में परिवार में ऑपरेशन को लेकर आशंका थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया और इलाज के लिए तैयार किया।
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स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में विक्रम को बेहतर उपचार के लिए रायपुर के मेडिशाइन अस्पताल ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उसका सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद विक्रम के कटे होंठ और तालु को ठीक कर दिया गया।

इलाज के कुछ ही सप्ताह बाद जब विक्रम अपने गांव लौटा, तो उसमें बड़ा बदलाव दिखाई दिया। पहले जहां वह लोगों के सामने आने से झिझकता था, वहीं अब वह आत्मविश्वास के साथ सबके बीच बातचीत करता है और खुलकर मुस्कुराता है। वह घर के छोटे-छोटे कामों में भी अपने माता-पिता का हाथ बंटाने लगा है।

विक्रम के पिता नरसिंग कश्यप का कहना है कि चिरायु योजना उनके बेटे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस पहल के चलते उनके बेटे को नया जीवन मिला है।

विक्रम की कहानी यह संदेश देती है कि शासन की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी बेहतर इलाज और उज्ज्वल भविष्य का अवसर मिल सकता है। परिवार ने इस बदलाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सा दल के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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