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CG News: पांच नाबालिक लड़कियों का होने जा रहा था बाल विवाह, 18 साल होने में थे छह महीने बाकी, रोका गया शादी

Thu, 13 Feb 2025 12:58 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर, जांजगीर-चांपा

सार

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बाल-विवाह का मामला सामने आया है। जांजगीर-चांपा जिले में एक नाबालिग बालिका का विवाह रोका गया। पूरा मामला विकासखंड बलौदा के ग्राम बुड़गहन का है।
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महिला बाल विकास विभाग ने रोका नाबालिग बालिका का विवाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बाल-विवाह का मामला सामने आया है। जांजगीर-चांपा जिले में एक नाबालिग बालिका का विवाह रोका गया। पूरा मामला विकासखंड बलौदा के ग्राम बुड़गहन का है। जहां महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस टीम ने एक नाबालिग बालिका का विवाह रोका। जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अवरीद में  अलग-अलग परिवारों में 5 नाबालिक लड़कियों का बाल विवाह को रोकने में महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस विभाग की टीम ने समय पर रुकवाया है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बाल विकास से होने वाले दुष्परिणाम और कानूनी कार्यवाही के बारे में जानकारी दी। तब जाकर परिजनों ने विवाह को रोका है, जिसमें 3 नाबालिक लड़कियों की शादी 18,19 और 21 फरवरी से तथा 2 नाबालिक लड़की की शादी दिसंबर माह 2025 में तय हुई थी। जिला प्रशासन ने विगत कुछ दिनों में 14 बाल विवाह को रोकने में सफलता मिली है। 
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जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र सिंह जायसवाल ने बताया कि, कलेक्टर आकाश छिकारा और महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी अनीता अग्रवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम के साथ  फरवरी और दिसंबर माह में होने वाले 5 बाल विवाह को रोका गया है। नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अवरीद में हमे नाबालिक लड़कीयो की विवाह होने की जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर 5 अलग-अलग परिवार के बालिकाओं की अंक सूची की जांच की गई जिसमे वर्तमान विवाह आयु से उम्र कम पाया गया। 

जिसपर बालिकाओं के माता-पिता और मेहमानों को बाल विवाह के बारे में बताया गया कि इस विवाह से नाबालिक बालिकाओं के स्वास्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है परिवारों में तनाव लड़ाई झगड़े होते है। वही बाल विवाह पर सख्त कानून भी बना है जिसमें जेल और अर्थ दण्ड शामिल है साथ ही शादी में शामिल मेहमानों को भी सजा हो सकती है।  
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5 नाबालिक लड़कियों के परिजनों को समझाने के बाद विवाह को रोकने में सहमति बनी  वही लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़कों की उम्र 21 वर्ष होने पर विवाह करे इससे पहले विवाह न करे जिसपर संबंधी घोषणा पत्र और राजीनाम पत्र में गवाहों के समकक्ष हस्ताक्षर कराया गया।

बाल विवाह की सूचना मिलने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अनिता अग्रवाल और जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र सिंह जायसवाल के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। टीम ने पुलिस विभाग के सहयोग से ग्राम बुड़गहन पहुंचकर बालिका के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की, जिसमें उसकी उम्र 17 वर्ष 06 माह पाई गई। चूंकि विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 वर्ष है, इसलिए यह स्पष्ट रूप से बाल विवाह का मामला था।

बालिका का विवाह 19 फरवरी 2025 को तय किया गया था, जिसकी पूरी तैयारी हो चुकी थी। टीम ने बालिका, उसके माता-पिता और स्थानीय लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया। उन्हें बताया गया कि बाल विवाह न केवल बालिका के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को बाधित करता है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। अधिकारियों द्वारा दी गई समझाइश के बाद स्थानीय लोगों की उपस्थिति में बालिका के माता-पिता ने विवाह रोकने पर सहमति व्यक्त की।
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