कांकेर जिले के हैरान कर देने वाले छात्रावास मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा तैयार रिपोर्ट में झलियामारी स्थित आदिवासी हॉस्टल की स्थिति को बेहद खराब बताया गया है। आयोग ने इसके लिये राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही रिपोर्ट में बच्चियों की मानसिक स्थिति के बारे में भी बताया गया है।
महिला आयोग ने रिपोर्ट में राज्य सरकार के अनुदान से चल रहे इस हॉस्टल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया है। रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि नहाने और टॉयलेट के लिए भी हॉस्टल की बच्चियां खुले में जाती हैं।
पीड़ित बच्चियों की मानसिक स्थिति के संबंध में महिला आयोग का कहना है कि उन बच्चियों को पता तक नहीं है कि उनके साथ कुछ गलत हुआ है। छोटी बच्चियों को उनकी सीनियर लड़कियां इन सारी बातों के बारे में पहले ही बताकर जाती थीं। सीनियर उन्हें समझाती थी कि यह पढ़ाई का एक हिस्सा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित बच्चियों के डिप्रेशन में जाने का खतरा है। अगर बच्चियों की काउंसलिंग नहीं की गई तो उनमें से कुछ बच्चियों की हालत बिगड़ सकती है। इस छात्रावास में लंबे समय से छोटी बच्चियों का शोषण किया जा रहा था।