Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की योजनायें ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। यह संरचना जल संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, सूखे की स्थिति में किसानों को राहत प्रदान करने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की योजनायें ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड की ग्राम पंचायत राजपुर में निर्मित सामुदायिक चेक डेम जल संरक्षण का उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरा है। इस परियोजना ने न केवल बारिश के पानी को संरक्षित किया है, बल्कि किसानों को वर्षभर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी आय भी बढ़ाई जा रही है।
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ग्राम पंचायत राजपुर में भागवत के खेत के पास बने इस सामुदायिक चेक डेम के निर्माण के लिए 16.02 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। परियोजना के पूर्ण होने तक कुल 15.69 लाख रुपए व्यय किए गए, जिसमें 2.79 लाख रुपए मजदूरी एवं 12.55 लाख रुपए सामग्री पर खर्च किए गए। इस कार्य से कुल 1671 मानवदिवस का रोजगार दिया गया। स्थानीय श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिला। इससे पलायन में कमी आई और कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
10 हजार घनमीटर से अधिक जल संरक्षण क्षमता
12 मीटर स्पैन वाले इस चेक डेम की 10,080 घनमीटर जल संरक्षण क्षमता पूरे क्षेत्र की जल व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रही है। पहले जहां वर्षा का अधिकांश पानी बहकर नालों में चला जाता था। अब वही पानी संरक्षित होकर धीरे-धीरे भू-जल भंडार को समृद्ध कर रहा है। इस वजह से आसपास के कुएं, हैंडपंप और बोरवेल का जलस्तर बढ़ा है।
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किसानों की बढ़ी आय
इस परियोजना का लाभ भगवाता सुखराम, बुसाहु राम सिंह, चितरेखा पुनित, ईष्वरी मधुर सिंह, केवल पचरू सहित अनेक किसानों को मिल रहा है। पहले जहां खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, वहीं अब किसान खरीफ के साथ-साथ रबी और सब्जी की भी खेती कर रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से उत्पादन में वृद्धि हुई है, खेती की लागत कम हुई है और किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है।
तकनीकी सहायक पूजा पटेल के अनुसार, चेक डेम का निर्माण सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है। इससे लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकती है। यह संरचना जल संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, सूखे की स्थिति में किसानों को राहत प्रदान करने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।