कांग्रेस नेता अंतिम संस्कार में पहुंचे।
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सीने में दर्द के बाद देर रात मौत
छुरा विकासखंड के मेड़कीडबरी निवासी शैलेंद्र की सोमवार रात करीब 8 बजे अचानक तबीयत बिगड़ी। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद परिवार के लोग उन्हें पास के डॉक्टर के पास ले गए। उनकी सलाह पर एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की तैयारी हो रही थी, इसी बीच शैलेंद्र की मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस के जवानों सहित आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक राम ध्रुव व जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री चिराग अली पहुंचे और अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सीएम भूपेश के साथ शैलेंद्र।
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16 साल की उम्र में बनाया गया कलेक्टर
प्रोजेरिया बीमारी के चलते शैलेंद्र शारीरिक रूप से कमजोर और वृद्ध नजर आने लगे थे। उनकी इच्छा थी कि पढ़-लिखकर वह एक दिन कलेक्टर बनें। मीडिया के जरिए यह बात मुख्यमंत्री बघेल तक पहुंची तो उन्होंने शैलेंद्र को एक दिन के लिए गरियाबंद जिले का कलेक्टर बना दिया। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर रुचि शर्मा शैलेंद्र को उनके घर लेने पहुंची थीं। कलेक्टर निलेश क्षीरसागर ने सारे प्रोटोकॉल का पालन किया था। मुख्यमंत्री बघेल ने एसपी-कलेटक्टर कॉन्फ्रेंस में शैलेंद्र को अपने बगल में जगह दी थी।
क्या है प्रोजेरिया बीमारी
प्रोजेरिया सिंड्रोम एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है। इसे बेंजामिन बटन के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिकी की मशहूर क्लीवलैंड क्लीनिक का कहना है कि यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि दुनियाभर में दो करोड़ लोगों में से लगभग एक को ही प्रभावित करती है। प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब 350 से 400 बच्चे प्रोजेरिया से पीड़ित हैं।
क्यों होती है यह बीमारी?
विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों में यह बीमारी लैमिन-ए-जीन में गड़बड़ी होने के कारण होती है। इस बीमारी के संकेत पहले से नहीं मिलते, यह अचानक ही हो जाती है, लेकिन दो साल तक की उम्र में बच्चों में इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
- बच्चों की लंबाई और वजन का कम होना
- शरीर का कमजोर होना
- सिर के बाल झड़ जाना
- सिर का आकार बढ़ जाना
- किसी बुजुर्ग व्यक्ति की तरह त्वचा का ढीला होना
- होंठ पतले होना