मानसून के दौरान मौसम भले ही गर्मी से राहत देता हो, लेकिन बढ़ी हुई नमी और उमस संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। विशेषज्ञों ने लोगों से इस मौसम में खानपान और स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
कृषि विज्ञान केंद्र, रायगढ़ की आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. मनीषा चौधरी के अनुसार, बारिश के मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं। इससे भोजन और पेय पदार्थ आसानी से दूषित हो जाते हैं, जिसके कारण फूड पॉइजनिंग, दस्त, टाइफाइड, वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने सलाह दी कि इस मौसम में हमेशा ताजा, स्वच्छ और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, बासी भोजन, कटे फल, जूस, चाट, गोलगप्पे और अन्य स्ट्रीट फूड से बचना चाहिए। पीने के लिए उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही उपयोग करें।
विशेषज्ञों ने दालें, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे आंवला, अमरूद और संतरा नियमित आहार में शामिल करने की सलाह दी है। साथ ही करेला, मेथी, हल्दी, तुलसी और नीम जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार बताए गए हैं। हल्का भोजन, जैसे खिचड़ी, दलिया, सूप और भुट्टा भी इस मौसम में लाभदायक माना गया है।
स्वच्छता को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। भोजन को हमेशा ढककर रखें, फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें और कच्चे तथा पके खाद्य पदार्थों को अलग रखें। फ्रिज में रखे भोजन को दोबारा खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करें। बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनने की सलाह दी गई है ताकि फंगल संक्रमण से बचा जा सके।
विशेषज्ञों ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों की देखभाल पर खास ध्यान देने को कहा है। साथ ही घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की गई है, ताकि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों की रोकथाम हो सके।
उन्होंने कहा कि यदि लगातार बुखार, उल्टी, दस्त या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लें और स्वयं दवा लेने से बचें। संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद अपनाकर मानसून के दौरान होने वाले संक्रमणों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।