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CG: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से मिली जमानत

Fri, 02 Jan 2026 05:15 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

Chhattisgarh Liquor Scam Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रदेश के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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Chhattisgarh Liquor Scam Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रदेश के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है। उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। उच्च न्यायालय बिलासपुर के जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने यह निर्णय सुनाया है। फिलहाल, उन्हें ईओडब्ल्यू और ईडी मामले में जमानत मिली है। अन्य मामलों में जांच जारी है।
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ईडी के वकील ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चैतन्य को शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दी है। वे लगभग 168 दिनों के बाद जेल से रिहा होंगे।


तीन हजार करोड़ से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी
ईओडब्ल्यू और एसीबी ने दावा करते हुए बताया कि करीब 3,800 पन्नों चार्जशीट में चैतन्य बघेल को तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले में आरोपी बनाया गया है। इस मामले में अब तक कुल आठ चार्जशीट पेश किये जा चुके हैं। नई चार्जशीट में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ जांच की मौजूदा स्थिति रिपोर्ट दिया गया है। वहीं हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों से डिजिटल साक्ष्य रिपोर्ट भी शामिल हैं। यह दस्तावेज आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ चल रही जांच की प्रगति की भी रूपरेखा बताता है।
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सिंडिकेट को देते थे निर्देश 
चार्जशीट का हवाला देते हुए बताया गया है कि चैतन्य बघेल ने अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास जैसे अधिकारियों के बीच समन्वयक के रूप में काम किया, जो प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हितों के अनुसार काम करते थे और नेटवर्क के जमीनी स्तर के संचालकों जैसे अनवर ढेबर, अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल (सभी सह-आरोपी) को निर्देश जारी करते थे।

घोटाले की रकम को किया ट्रांसफर और मैनेज
चार्जशीट में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल ने अपने भरोसेमंद सहयोगियों के माध्यम से व्यवसायी अनवर ढेबर की टीम की ओर से वसूली गई घोटाले की रकम को ऊपर तक पहुंचाया गया। उसने शराब व्यवसायी त्रिलोक सिंह ढिल्लों की विभिन्न फर्मों के माध्यम से अपने हिस्से की रकम प्राप्त की। इसे बैंकिंग चैनलों के माध्यम से अपनी पारिवारिक फर्मों में ट्रांसफर किया और रियल एस्टेट परियोजनाओं में इसका इस्तेमाल किया। इसके अलावा चार्जशीट में दावा किया गया है कि उसने अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और सहयोगियों के ज़रिए बैंकिंग चैनलों से घोटाले से मिले पैसे की बड़ी रकम ली और इन्वेस्ट किया।

शराब घोटाले में शामिल रकम करीब 3,074 करोड़ रुपये होने का अनुमान
जांच एजेंसी ने कहा कहा कि "सबूतों से पता चलता है कि चैतन्य ने ऊंचे लेवल पर अपराध की कमाई को मैनेज करने के साथ-साथ अपने हिस्से के तौर पर लगभग 200 करोड़ रुपये से 250 करोड़ रुपये लिए। सिंडिकेट को दी गई हाई-लेवल सुरक्षा, पॉलिसी/एडमिनिस्ट्रेटिव दखल और प्रभाव के कारण यह अपराध लंबे समय तक चलता रहा। जांच से पता चलता है कि शराब घोटाले में शामिल रकम लगभग 3,074 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि आगे की जांच से पता चला है कि कथित घोटाले से अपराध की कुल कमाई तीन हजार पांच करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। जांच एजेंसी ने बताया कि कई आरोपियों के खिलाफ अभी जांच जारी है। 

सरकारी खजाने को पहुंचा नुकसान
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि कथित घोटाले से सरकारी खजाने को काफी नुकसान पहुंचा है। इस घोटाले से एक शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबें भर गईं। यह घोटाला साल 2019 और 2022 के बीच हुआ। उस दौरान छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार की सरकार थी और चैतन्य बघेल के पिता भूपेश बघेल सीएम थे। दूसरी ओर ईडी की ओर से पहले दायर चार्जशीट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से मिले एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की "अपराध की कमाई" को "हैंडल" किया था।


ईडी ने चैतन्य को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार
चैतन्य बघेल के बर्थडे पर 18 जुलाई को ईडी ने भिलाई स्थित उनके निवास पर छापा मारकर गिरफ्तार किया था। उन पर दो हजार करोड़ के शराब घोटाले में जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा है। चैतन्य बघेल को धन शोधन रोधी अधिनियम की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, नए सबूत मिलने के बाद की गई छापेमारी के दौरान चैतन्य कथिततौर पर सहयोग नहीं कर रहे थे। चैतन्य बघेल से कथित रूप से जुड़ी कंपनियों को कथित शराब घोटाले से अर्जित लगभग 17 करोड़ रुपये की 'अपराध आय' प्राप्त हुई है। करीब 1,070 करोड़ रुपये की धनराशि के साथ ही उनकी भूमिका एजेंसी की जांच के दायरे में है। इसी मामले में ईडी ने 16 दिसंबर 2025 को पूछताछ के बाद सौम्या चौरसिया को भी गिरफ्तार किया था। 19 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। 

शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले
ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि चैतन्य बघेल को इस शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी। उन्होंने अपनी रियल एस्टेट फर्मों का इस्तेमाल इस धनराशि को आपस में मिलाने के लिए किया था। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे उनके साथ सहयोग करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनके बेटे के खिलाफ ईडी की कार्रवाई राज्य में "अवैध वृक्ष कटाई" से ध्यान हटाने के लिए शुरू की गई थी, क्योंकि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने वाली थी। जांच एजेंसी ने कहा कि जूनियर बघेल चैनन्य ने त्रिलोक सिंह ढिल्लों नामक एक स्थानीय व्यवसायी के साथ सांठगांठ की और उसकी कंपनियों का उपयोग करके एक ऐसी योजना जिसके तहत उन्होंने ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने "विट्ठलपुरम प्रोजेक्ट" में फ्लैट खरीदने के नाम पर पांच करोड़ रुपये प्राप्त किए। ईडी ने कहा बैंकिंग ट्रेल से पता चलता है कि संबंधित लेन-देन के दौरान, त्रिलोक सिंह ढिल्लों को शराब सिंडिकेट से अपने बैंक खातों में भुगतान प्राप्त हुआ।

बंसल, त्रिलोक और दीपेंद्र के जरिये चैतन्य तक पहुंचा पैसा
ईडी के अधिकारियों को ये साबूत बघेल करीबियों से पूछताछ के बाद मिले हैं। पप्पू बंसल, त्रिलोक ढिल्लन और दीपेंद्र चावड़ा के माध्यम से चैतन्य बघेल पैसा पहुंचाया गया। ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने रायपुर कोर्ट में कही। चैतन्य बघेल ने ये पैसा हवाला कारोबारियों की सहायता से अलग-अलग राज्यों में निवेश करवाया।  ईडी की कार्रवाई के दौरान एक पेन ड्राइव भी मिला है। इसे लेकर  ईडी ने पप्पू बंसल और दीपेन चावड़ा से पूछताछ की थी। इस मामले में ईडी ने दुर्ग के बघेल बिल्डकॉन और बिलासपुर के विट्टल ग्रीन्स को भी अपने जाँच के दायरे में रखा है। ईडी ने इनमें से कई लोगों के बयानों का हवाला देते हुए यह लिख रखा है कि इस पूरे चेन के ज़रिए लभभग एक हजार करोड़ रुपए लगाकर पैसे सफेद करने की कथित कोशिश का पता चला है। इस चेन में अनवर ढेबर ने दीपेंद्र को दिए गए शराब स्कैन के पैसे भी गए हैं। इनमें से अधिकांश आरोपी शराब घोटाला मामले में जेल में बंद हैं।

दस महीने पहले भी पड़ी थी रेड
ईडी शराब घोटाला, कोल घोटाला, महादेव सट्टा एप समेत कई मामलों की जांच कर रही है। 10 मार्च 2025 को ईडी टीम ने बस्तर, रायपुर और भिलाई में छापेमारी की थी। भूपेश बघेल के भिलाई और रायपुर स्थित निवास, कारोबारी पप्पू बंसल, दीपेन चावड़ा, समेत अन्य कारोबारियो के ठिकानों पर दबिश दी थी। आरोपियों से जब्त पेन ड्राइव से मिले बयानों की समीक्षा की। आठ महीने बाद भूपेश बघेल की ठिकाने पर दोबारा दबिश देकर भिलाई से चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया था।

क्या करते हैं चैतन्य बघेल?
चैतन्य बघेल रियल एस्टेट जुड़े हैं। उन्हें बिट्टू के नाम से भी जाना जाता है। जुलाई में उनके फार्म ने भिलाई में दो रिहायसी कॉलोनी विट्ठलपुरम और विट्ठल ग्रीन्स बनाई है। चैतन्य करोड रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। इस कारोबार से उन्हें हर कमाने करोड़ों रुपये की कमाई होती है।

खेती भी है इनकम का जरिया
भूपेश बघेल की दुर्ग जिले के कुरुदडीह गांव में खेत है। ऐसा कहा जाता है कि उनकी फैमिली के पास लगभग 100 एकड़ से ज्यादा की जमीन है, जिसमें खेती करते हैं। अक्सर पूर्व सीएम और चैतन्य बघेल अपने खेतों की फोटो शेयर करते रहते हैं। धान की खेती से अच्छी आमदनी होती है। रियल-ए- स्टेट के साथ ही चैतन्य पिता के साथ खेती भी करते हैं। दूसरी ओर शादी से पहले उनकी पत्नी बैंक में नौकरी करती थीं। 

यहां जानें शराब घोटाले की पूरी कहानी...
  1. छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने 20 मई 2025 को प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी की थी। दुर्ग-भिलाई, महासमुंद, धमतरी, रायपुर समेत 20 से ज्यादा जगहों पर टीम ने दबिश दी थी। दुर्ग-भिलाई में 22 जगहों पर कार्रवाई हुई थ। एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमें चार गाड़ियों में मंगलवार सुबह पांच बजे भिलाई पहुंची थी। महासमुंद जिले के सांकरा और बसना में भी छापेमारी हुई थी।  प्रदेश के पूर्व आबकारी मंत्री रह चुके कवासी लखमा के करीबियों के ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी।
  2. दुर्ग-भिलाई में एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम शराब घोटाले से जुड़े कारोबारियों के यहां पहुंची थी। भिलाई के आम्रपाली अपार्टमेंट में अशोक अग्रवाल की फेब्रीकेशन और अन्य चीजों की फैक्ट्री है। अशोक अग्रवाल पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी हैं। उन पर लखमा के साथ मिलकर शराब घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।  
  3. इसके अलावा एसके केजरीवाल, नेहरू नगर भिलाई, विनय अग्रवाल, खुर्सीपार,संजय गोयल, डायरेक्टर स्पर्श हॉस्पिटल, नेहरू नगर,विश्वास गुप्ता बिल्डर, दुर्ग,बंसी अग्रवाल, नेहरू नगर भिलाई,आशीष गुप्ता, डायरेक्टर, आशीष इंटरनेशनल होटल सुपेला, नेहरू नगर स्थित घर में कार्रवाई हुई थी।
  4. महासमुंद जिले के सांकरा में किराना व्यवसायी कैलाश अग्रवाल और बसना में एलआईसी एजेंट जय भगवान अग्रवाल के यहां ईओडब्लू की दबिश दी थी। शराब घोटाला मामले में ईओडब्लू ने दोनों व्यवसायी के घर टीम पहुंची थी। चार वाहनों में करीब 20 सदस्यीय टीम रिकॉर्ड खंगालने के लिए पहुंची थी। जय भगवान अग्रवाल भिलाई के पप्पू बंसल के रिश्तेदार बताये जा रहे हैं। पप्पू बंसल के यहां शराब से जुड़े मामले में पहले भी छापा पड़ चुका है। 


डुप्लिकेट होलोग्राम लगाकर बड़ी मात्रा में अवैध शराब बेची
ईडी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2019-2022 तक लाइसेंसी शराब दुकानों में  डुप्लिकेट होलोग्राम लगाकर बड़ी मात्रा में अवैध शराब बेची गई थी। इस वजह से छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। शराब को स्कैनिंग से बचाने के लिए नकली होलोग्राम भी लगाया जाता था, जिससे वह किसी की पकड़ में न आ सके। घोटाले में संलिप्त लोगों ने इस होलोग्राम को बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के नोएडा में होलोग्राफी का काम करने वाली प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को टेंडर दिया था। यह कंपनी होलोग्राम बनाने के लिए पात्र नहीं थी, फिर भी नियमों में संशोधन करके यह टेंडर कंपनी को दे दिया गया था। 


शराब खरीदी में रिश्वतखोरी 
पूर्व की कांग्रेस सरकार पर आरोप है कि सीएसएमसीएल (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय) से शराब खरीदने के दौरान रिश्वतखोरी हुई। प्रति शराब मामले के आधार पर राज्य में डिस्टिलर्स से रिश्वत ली गई और देशी शराब को ऑफ-द-बुक बेचा गया। ईडी के मुताबिक, डिस्टिलर्स से कार्टेल बनाने और बाजार में एक निश्चित हिस्सेदारी की अनुमति देने के लिए रिश्वत ली गई थी। ईडी की चांच में पता चला कि टेंडर दिलाने के एवज में कंपनी के मालिक से कमीशन लिया गया था। इस मामले में जब कंपनी के मालिक विधु गुप्ता को ईडी ने अरेस्ट किया तो उसने कांग्रेस सरकार में सीएसएमसीएल में एमडी अरुणपति त्रिपाठी, रायपुर महापौर के बड़े भाई शराब कारोबारी अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा का नाम लिया। जब ईडी ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, तो मामले में और भी खुलासे हुए। फिर साल 2024 में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम सामने आया। ED की जांच में पता चला है कि लखमा को शराब घोटाले से पीओसी (प्रोसीड ऑफ क्राइम) से हर महीने कमिशन मिलता था।


शराब घोटाला से मिले रकम को अपने परिजनों के नाम पर किया निवेश
एफआईआर के मुताबिक अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर ने शराब घोटाला से मिले रकम को अपने परिवार वालों के नाम पर निवेश किया। टुटेजा ने अपने बेटे यश टुटेजा के नाम पर निवेश किया और त्रिपाठी ने अपनी पत्नी अपनी पत्नी मंजूला त्रिपाठी के नाम पर फर्म बनाया जिसका नाम रतनप्रिया मीडिया प्रइवेट लिमिटेड था। ढेबर ने अपने बेटे और भतीजों के फर्म पर पैसे निवेश किया।

मिलता था कमीशन
जांच में मालूम चला है कि आबकारी अधिकारियों को अपने-अपने इलाकों में पार्ट-बी शराब बिकवाने के बदले में प्रति मामले में 140 रुपये का कमीशन दिया जाता था। ऐसे में आईएएस ऑफिसर निरंजन दास ने अकेले 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई की। उन्हें हर महीने लगभग 50 लाख रुपये की रिश्वत मिलती थी। कुल मिलाकर 31 आबकारी अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। 

ऐसे खुला राज!
ईडी की चांच में पता चला कि टेंडर दिलाने के एवज में कंपनी के मालिक से कमीशन लिया गया था। इस मामले में जब कंपनी के मालिक विधु गुप्ता को ईडी ने अरेस्ट किया तो उसने कांग्रेस सरकार में सीएसएमसीएल में एमडी अरुणपति त्रिपाठी, रायपुर महापौर के बड़े भाई शराब कारोबारी अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा का नाम लिया। जब ईडी ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, तो मामले में और भी खुलासे हुए। फिर साल 2024 में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम सामने आया। ED की जांच में पता चला है कि लखमा को शराब घोटाले से पीओसी (प्रोसीड ऑफ क्राइम) से हर महीने कमिशन मिलता था।


शराब घोटाले केस में अब तक ये अरेस्ट
  • सेवानिवृत्त आईएएस ऑफिसर अनिल टुटेजा
  • शराब कारोबारी अनवर ढेबर (रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के बड़े भाई) 
  • अरुण पति त्रिपाठी (तत्कालीन सीएसएमसीएल के एमडी)
  • अरविंद सिंह
  • नितेश पुरोहित
  • सुनील दत्त
  • त्रिलोक सिंह  ढील्लन (कारोबारी)
  • पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा 
  • विकास अग्रवाल
  • अनुराग द्विवेदी
  • अनुराग सिंह
  • दिलीप पांडे
  • दीपक द्वारी
  • चैतन्य बघेल (अब जमानत मिली)
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