छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पीठ ने राज्य में सड़कों की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायाधीश संतोष शर्मा की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 से याचिका लंबित होने के बाद भी सड़कों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए विभिन्न शपथ पत्रों से सामने आया है कि राज्य की, विशेष रूप से बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की हालत अत्यंत खराब बनी हुई है।
जनहित याचिका पर सुनवाई
सेंदरी-मोपका बाईपास के निर्माण को लेकर राज्य सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रुख पर अदालत ने गहरी हैरानी जताई। प्राधिकरण की ओर से दायर शपथ पत्र में बताया गया कि मोपका-सेंदरी सड़क अब तक उन्हें सौंपी ही नहीं गई है। वर्तमान में यह मार्ग राज्य के लोक निर्माण विभाग के अधिकार क्षेत्र में है तथा इसके संचालन व रखरखाव का दायित्व भी इसी विभाग का है। इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य शासन इस परियोजना को पूर्ण करने में रुचि नहीं ले रहा अथवा इसे प्राधिकरण को हस्तांतरित करने का इच्छुक नहीं है। इस मामले में शासकीय अधिवक्ता ने लोक निर्माण विभाग के सचिव का शपथ पत्र पेश करने हेतु अतिरिक्त समय की मांग की है।
नगर निगम आयुक्त को चेतावनी और समय-सीमा का निर्देश
सुनवाई के समय बिलासपुर नगर निगम की ओर से किसी भी अधिवक्ता के उपस्थित न रहने पर उच्च न्यायालय ने अत्यंत कड़ी नाराजगी व्यक्त की। पीठ ने निगम आयुक्त को आगामी सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने अथवा निगम की तरफ से किसी उचित प्रतिनिधि की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। पीठ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना को पूर्ण करने में लगने वाली समय-सीमा की विस्तृत जानकारी हासिल करने का निर्देश दिया है। इसके लिए बिलासपुर तथा रायपुर के परियोजना अधिकारियों को पृथक-पृथक शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने नगर निगम क्षेत्र की बदहाल सड़कों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में एक भी सड़क ऐसी नहीं है जिसे ठीक से चलने योग्य कहा जा सके। उन्होंने आगामी पूजा पर्व से पूर्व सड़कों की मरम्मत न होने पर हादसों और नागरिकों के घायल होने की गंभीर आशंका जताते हुए तत्काल सुधार की मांग की।
डामर की दरें बढ़ने से अधर में लटके निर्माण कार्य
नगर निगम की लगभग 12 किलोमीटर लंबी पांच प्रमुख सड़क परियोजनाओं का निर्माण कार्य डामरीकरण के चरण में पहुंच चुका है। हालांकि डामर की दरों में हुई भारी बढ़ोतरी और आपूर्ति की कमी के कारण ठेकेदारों ने काम आगे बढ़ाने से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ठेकेदार संघ स्वीकृत प्राकलन (एस्टीमेट) में संशोधन की मांग पर अड़ा हुआ है, जिसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से निर्देश मिलने के बाद प्राकलन संशोधित किया जाएगा, जिससे इन परियोजनाओं की कुल लागत में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है। वर्तमान में इन सड़कों की अनुमानित लागत करीब 50 करोड़ रुपये है। प्रभावित परियोजनाओं में अशोक नगर मार्ग, साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी मार्ग, अपोलो मार्ग, स्मृति वन से शनि मंदिर मार्ग और अरपा अटल पथ प्रमुख रूप से शामिल हैं। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को तय की है। तब तक नगर निगम आयुक्त को अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों के जीर्णोद्धार हेतु उठाए गए कदमों का ब्योरा शपथ पत्र के माध्यम से देना होगा।