छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों में प्रोबेशन यानि कि परिविक्षा अवधि के कार्यकाल और वेतन भत्तों के नियमों में सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन अवधि दो साल की जगह तीन साल का होगा और पहले एक साल के लिए नए कर्मचारियों के वेतन में 30 फीसदी कटौती दी जाएगी।
नए नियम के आधार उन्हें 70 फीसदी मूल वेतन और इसी के आधार पर भत्तों को भुगतान किया जाएगा। राज्य के वित्त विभाद ने 28 जुलाई को इससे संबंधित नए नियमों की जानकारी दी, जिसके बाद से विपक्ष ने इस पर हंगामा करना शुरू कर दिया है।
सरकार की ओर से किए गए बदलाव में सरकारी नौकरियों के प्रोबेशन के तहत पहले साल के लिए कर्मचारियों को 70 फीसदी, दूसरे साल के लिए 80 फीसदी और तीसरे साल के लिए 90 फीसदी वेतन का भुगतान किया जाएगा। इसी के साथ तीन साल की प्रोबेशन अवधि समाप्त होने पर कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जाएगा।
वित्त विभाग के एसीएस अमिताभ जैन का कहना है कि ये नए नियम सभी सरकारी भर्तियों पर लागू होंगे। बता दें कि इससे पहले मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार भी इस नियम को लागू कर चुकी थी, पिछले साल नवंबर में सरकार ने मध्यप्रदेश लोक सेवा नियम 1961 में संशोधन किया था।
सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्तियों को छोड़कर बाकी पदों के लिए प्रोबेशन अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी थी। इसके अलावा स्टायपेंड में भी 30, 20 औऱ 10 फीसदी की कटौती का आदेश दिया था।
हालांकि छत्तीसगढ़ के इस फैसले का विपक्ष ने जमकर विरोध किया है। बीजेपी नेता और पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी का मानना है कि सरकार के इस फैसले से युवाओं के साथ धोखा होगा। उन्होंने राज्य सरकार ने अपने फैसले को वापस लेने के लिए कहा है।
चौधरी का कहना है कि यूपीएससी और पीएससी के तहत कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विधायकों का वेतन बढ़ा दिया है और कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी है, इस फैसले से साफ होता है कि राज्य की कांग्रेस सरकार जन विरोध नीतियों का समर्थन करती है।