रायपुर के दाऊ क्ल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लापरवाही भरा मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने सर्जरी के दौरान एक मरीज के पेट में डेढ़ फुट लंबा तार छोड़कर उसे छुट्टी दे दी। मरीज का डायलिसिस करने के लिए फिशटुला बनाना था। इसके लिए तार को जांघ से गर्दन तक पहुंचाया गया था। तार को खींचते समय वह टूट गया और आधा पेट में ही रह गया।
दो महीने तक मरीज दर्द से तड़पता रहा। जिसके बाद मरीज ने एक निजी डॉक्टर के कहने पर एक्स-रे करवाया तब पता चला कि मरीज के पेट में तार हैं। परिवार वाले मरीज को दोबारा डीकेएस ले गए।
डॉक्टरों ने यहां सर्जरी से इनकार कर दिया और मरीज को अंबेडकर अस्पताल भिजवा दिया। जहां अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर भी तार नहीं निकाल सकें। जिसके बाद परिजनों ने मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया जहां मरीज की सर्जरी कर उसके पेट से तार बाहर निकाला गया।
मरीज का नाम देवनारायण है। देवनारायण की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। परिजन पुलिस में मामला दर्ज करने की तैयारी में है। परिजनों ने बताया कि देवनारायण के हाथ में डायलिसिस के लिए बना फिशटुला टूट गया था। उसके बिना डायलिसिस नहीं हो सकती थी। परिवार वालों के पास निजी अस्पताल में इलाज के पैसे न होने के कारण मरीज को डीकेएस ले जाया गया।
डॉक्टरों ने मरीज की जांच के बाद बताया कि फिशटुला के बिना डायलिसिस नहीं हो सकती है। इसलिए तार डालकर लाइन बनानी होगी। परिजनों की सहमति के बाद जांघ के पास से तार गले तक पहुंचाकर लाइन बनाई गई। तार खींचते समय आधा हिस्सा टूटकर मरीज के पेट में रह गया। दो-तीन दिन भर्ती रखने के बाद उन्होंने मरीज को छुट्टी दे दी।
घर जाने के बाद देवनारायण पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हुआ। उसे हमेशा बुखार रहने लगा। जब मरीज का एक्स- रे करवाया गया तब जाकर पता चला कि मरीज के पेट में तार छूट गया है।