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छत्तीसगढ़: सीआरपीएफ-डीआरडीओ ने विकसित की बाइक एंबुलेंस सेवा, नक्सल क्षेत्रों में जवानों की मदद करेगी 'रक्षिता'

Sat, 13 Feb 2021 01:02 AM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
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सीआरपीएफ-डीआडीओ ने तैयार की बाइक एंबुलेंस रक्षिता - फोटो : सोशल मीडिया
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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इमरजेंसी के दौरान चिकित्सा सहायता तत्काल उपलब्ध कराने की मंशा से सैनिकों के लिए 'बाइक एंबुलेंस' सेवा की शुरुआत की गई है। किसी ऑपरेशन के दौरान अगर कोई जवान घायल हो जाता है तो जंगलों के बीच उसे तुरंत ही  चिकित्सा सहायता देने में मुश्किल होती है। इसे देखते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) ने बाइक एंबुलेंस तैयार की है। 

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केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के अनुसार अगर फील्ड में ऑपरेशन के दौरान कोई कमांडो घायल होता है तो वहां उसकी मदद के लिए बाइक एंबुलेंस तैयार रहेंगी। इन्हें 'रक्षिता' नाम दिया गया है। फर्स्ट ऐड देने के साथ घायल जवान को यह बाइक जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएगी।  

सीआरपीएफ के डीजी एपी माहेश्वरी ने कहा, 'ये मोटरसाइकिल सीआरपीएफ और डिफेंस रिसर्च एंड डेवेलपमेंट (डीआरडीओ) की मदद से बनाई गई है। जहां भी हमारे सैनिक तैनात होंगे, जहां पर सड़क नहीं होंगी वहां पर यह मोटरसाइकिल एंबुलेंस काम करेंगी।' सीआरपीएफ ने ऐसी 21 बाइक एंबुलेंस के साथ शुरुआत की है।
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नक्सल प्रभावित इलाकों में आए दिन नक्सली सुरक्षा बलों के वाहनों को आईडी के जरिये निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में ऑपरेशन के लिए निकली जवानों की टीमों को हिदायत दी जाती है कि वह मुख्य सड़कों का इस्तेमाल ना करें।

घने जंगलों में जवानों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। ऐसे में कांबिंग ऑपरेशन के लिए बाइक्स का सहारा लिया जाता है। अगर मुठभेड़ मे कोई जवान घायल होता है तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने  होता है, लेकिन खराब रास्ते और मुख्य सड़कों पर नक्सलियों के आईईडी के खतरे को देखते हुए बहुत संभल कर धीरे-धीरे चलना होता है।  

ऐसे में इन जरूरतों को देखते हुए डीआरडीओ के साथ सीआरपीएफ के लिए डिजाइन की गई बाइक एंबुलेंस बहुत कारगर है। घायल जवानों के लिए यह संजीवनी से कम नहीं है। बाइक में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था के साथ जीपीएस मॉनिटर लगाया गया है। इससे घायल जवान के ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट की जानकारी मिलती रहती है। 

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