छत्तीसगढ़ सरकार के सामने बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ में नए मुख्यमंत्री का नाम तय होना अभी बाकी है। कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन कर रहा है। इन सब के बीच एक बात तय है कि नई सरकार को गठन के पहले दो हफ्तों में ही कई चुनौतियों का सामना करना होगा। इन्हीं में से एक चुनौती किसानों का कर्जमाफ करने की है। जानकारों के मुताबिक कर्जमाफी के वादे ने ही प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी कराई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने रैलियों में किया था वादा
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने चुनावी भाषणों में शपथग्रहण के 10 दिनों के भीतर किसानों से कर्जमाफी का वादा किया था। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में किसानों को पिछले दो साल का बकाया बोनस देने और धान का समर्थन मूल्य 2100 से बढा़कर 2500 करने का वादा किया था।
किसान नेता और जिला किसान संघ के सदस्य सुदेश टीकम ने कहा कि हमने चुनावों में कांग्रेस को समर्थन दिया था। हम न केवल इस बात को देखेंगे कि कांग्रेस कर्जमाफी करती है या नहीं बल्कि वादाखिलाफी करने पर सरकार के खिलाफ अभियान भी छेड़ेंगे। 17 दिसंबर को हम किसान स्वाभिमान रैली करके कांग्रेस सरकार का धन्यवाद करेंगे। वादा नहीं पूरा करने पर 11वें दिन से सरकार के खिलाफ आंदोलन होगा।
टीकम के मुताबिक भाजपा सरकार ने 2014-15 में धान पर 300 रुपये बोनस देने को कहा था, उन्होंने वादा पूरा नहीं किया। अब लंबी लड़ाई के बाद 2018 में खरीफ पर बोनस दे रही है। छत्तीसगढ़ में कृषि से जुड़े लोगों की खासी तादाद है।
गंगाजल लेकर खाई थी कसम
प्रदेश में दूसरे चरण के मतदान से पहले कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा और जयवीर शेरगिल सहित स्थानीय नेताओं ने हाथ में गंगाजल लेकर 10 दिनों में कर्जमाफी करने की कसम खाई थी। सूत्रों के मुताबिक सरकार के गठन से पहले ही सहकारी विभाग ने स्टेट बैंकों सहित अन्य बैंकों से किसानों के कर्ज से संबंधित जानकारियां मांगी है। कर्जमाफी होने पर प्रदेश पर पांच हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा।