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SC ने दिए हनुमान मंदिर तोड़ने के आदेश, भाजपा विधायकों की दलील न तोड़ें

Tue, 07 Jun 2016 01:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : indian express
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महीने भर पहले ही देश की शीर्ष अदालत ने रायपुर सिटी के जिस हनुमान मंदिर को अवैध निर्माण के कारण तोड़ने का आदेश दिया था उसे बचाने के लिए अब भाजपा विधायकों ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि जिस जगह पर मंदिर बनाया गया है वह छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल के ट्रस्ट के नाम है।  
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इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में दिए राज्य सरकार की ओर से दिए गए हलफमनामे में बताया गया था कि छगन लाल गोविंद राम ट्रस्ट के नाम किया गया जमीन का आवंटन अवैध है। इस संबंध में साल 2014 में तहसीलदार की ओर से ट्रस्ट को आदेश जारी किए गए थे। 

वहीं एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को अवैध मानते हुए उसे तोड़ने के निर्देश दिए हैं वहीं भाजपा के 34 विधायकों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए मंदिर को बचाने की मुहिम शुरू कर दी है। इसके लिए कई धार्मिक समूहों ने विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। मंदिर बचाओ समिति ने बताया कि वह इस संबंध में विचार कर रहे हैं कि इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की जाए।
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भाजपा के धारसीवा के विधायक देवजी पटेल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ नहीं हैं, हर कोई सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करता है। हम बस अदालत से यही कहना चाहते हैं कि वो हमारी भावनाओं को समझे। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का काम पूरा हो चुका है और मूर्तियों को उनकी जगह स्‍थापित किया जा चुका है। और उन्हें हटाने पर वह टूट भी सकती हैं।
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कांग्रेस ने राज्य सरकार और सीएम पर लगाया आरोप

- फोटो : getty images
असल में ये सारा विवाद बेशकीमती जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर है। जिसमें विधानसभा अध्यक्ष अग्रवाल पर अवैध तरीके से जमीन कब्जाने के आरोप लगे हैं। कब्जे के बाद इस जमीन पर एक मंदिर, 19 दुकानों, एक सत्संग भवन और पार्क का निर्माण किया गया है। इस मामले में कांग्रेस स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात भी कर चुकी है। हालांकि मंदिर की बात पर कांग्रेस के सुर भी बदल जाते हैं। जिसका कहना है कि उसने मंदिर तोड़ने की बात कभी नहीं की। 

वहीं भाजपा नेताओं की दलील है भावनाओं से जुड़ा मुद्दा होने के कारण उन्हें उम्‍मीद है इसका कुछ समाधान निकल आएगा। वहीं इस अवैध निर्माण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले एक एनजीओ संचालक राकेश चौबे बताते हैं कि जिस जमीन पर यह मंदिर स्‍थापित किया गया है वह मेले का मैदान है। अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के हलफनामे के बाद ही इस अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश दिया है तो भाजपा विधायक आस्‍था की आड़ में खुद ही शहर में अतिक्रमण को जारी रखने की मांग कर रहे हैं। 

वहीं चौबे ने दावा किया कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी कहते हैं कि कांग्रेस भी मंदिर के‌ खिलाफ नहीं है लेकिन मुद्दा ये है कि यह अवैध भूमि पर बना है। और इसके लिए पूरी तरह भाजपा जिम्मेदार है। जब सरकार ने अपने हलफनामे में माना है कि जमीन पर अवैध कब्जा है तो कैसे इस पर बने मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री रमन सिंह खुद मौजूद रहे।
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