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छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री की दौड़ में यूं चला सांप-सीढ़ी का खेल, जानें भूपेश बघेल कैसे पहुंचे 100 पर

Sun, 16 Dec 2018 01:22 PM IST
अमर शर्मा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
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भूपेश बघेल
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छत्तीसगढ़ में कौन बनेगा मुख्यमंत्री यह सवाल कांग्रेस पार्टी के लिए सांप-सीढ़ी के खेल जैसा हो गया था। पांच दिन से जारी इस खेल में मुख्यमंत्री पद के दावेदार नेता - भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत - कभी ऊपर चढ़े और धड़ाम से नीचे भी गिरे। 14 दिसंबर को लगा कि टीएस सिंहदेव का नाम आखिरी पायदान तक पहुंचा। लगा वे इस खेल में विजेता बनने वाले हैं। लेकिन अचानक गोटियां फेंकी गईं, खेल और खिलाड़ी दोनों बदल गए। 
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पार्टी की ओर से घोषणा हुई कि 15 दिसंबर की शाम विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री का नाम तय होगा। सियासी हलकों में दिनभर चर्चा तेज रही कि छत्तीसगढ़ की 'ध्वजा'  ताम्रध्वज साहू ही संभालेंगे। दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक मिठाईयां बंटने लगी। लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि साहू अचानक 99 अंक पर पहुंचकर सीधे नीचे जा पहुंचे। 

खेल फिर बदला

खेल फिर बदला। इस बार चर्चा चली कि छत्तीसगढ़ के नए ‘भूप' होंगे बघेल। लेकिन शाम ढलते ही यह फैसला भी बदल गया। इसके बार चर्चाओं के बाजार में ये खबर आई कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार 50-50 का फार्मूला लागू होने जा रहा है। यानी ढाई -ढाई साल के लिए दो मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद आपस में बांटेंगे। 

चारों दावेदारों की रस्साकशी

छत्तीसगढ़ में अप्रत्याशित रूप से भारी बहुमत जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री का चुनाव बहुत कठिन हो गया है। प्रदेश के चार दिग्गजों की रस्साकसी में आलाकमान भी उलझ गया। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, पर्यवेक्षक बनाए गए मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू दिल्ली में आला कांग्रेसी नेताओं के चक्कर लगाते रहे और रायशुमारी चलती रही। 

ताम्रध्वज के नाम पर बंटीं मिठाइयां

मीडिया में चल रही खबरों को मुताबिक 15 दिसंबर दोपहर तक तय हो गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ताम्रध्वज साहू के नाम पर विचार पक्का कर लिया है। खबरों की मानें तो राहुल गांधी ने चारों दावेदारों को अपने बंगले पर बुलाया और उनसे बातचीत के बाद अपने फैसले के बारे में बताया। चारों नेताओं के रायपुर पहुंचने के लिए चार्टर प्लेन का इंतजाम भी किया गया। जैसे ही यह फैसला छत्तीसगढ़ पहुंचा पटाखे फूटे और मिठाइयां बंटने लगीं। लेकिन इसके बाद उप मुख्यमंत्री के पद को लेकर पेंच फंस गया। 

फिर चला सियासी दांवपेंच

खबरों के मुताबिक राहुल गांधी ने खड़गे को यह जिम्मेदारी दी कि वे चारों नेताओं से बात करके उप मुख्यमंत्री का नाम तय करें। लेकिन यहां मतभेद हो गया। कोई भी नेता उप मुख्यमंत्री पद के लिए तैयार नहीं हुआ। इतना ही नहीं बाकी तीन नेताओं ने साहू के नाम पर आपत्ति जता दी। इसके बार फिर सियासी दांवपेंच चले। 

सत्ता का इतिहास फरेब भरा

सत्ता के इतिहास पर नजर डालें तो उप मुख्यमंत्री पद के फॉर्मूले का प्रयोग उत्तर प्रदेश में बसपा और भाजपा के बीच हुआ था, जो सफल नहीं हो सका था। कुछ ऐसा ही नजारा तब पेश आया था जब मध्यप्रदेश में उमा भारती मुख्यमंत्री थीं। जब वे कानूनी पचड़े में फंसी तो अपने विश्वस्त बाबूलाल गौर को कुर्सी सौंपी। बाद में जब वे लौटीं और गौर से कुर्सी छोड़ने को कहा तो वे मुकर गए। उसके बाद शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया था। 

लेकिन भूपेश पहुंचे 100 पर

लेकिन आखिरकार भूपेश बघेला ही इस खेल में 100 का आंकड़ा छू पाए और छत्तीगढ़ के 'भूप' बने। राजधानी रायपुर में पीएल पुनिया और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके नाम का एलान किया। एक पुरानी कहावत है जो जीता वही सिंकदर। राजनीति के खेल में भी यह बात फिट बैठती है। 
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