छत्तीसगढ़ में टिकट वितरण की कशमकश से जूझ रही कांग्रेस व भाजपा में दावेदारों की धड़कनें तेज हैं। इसी के चलते ये दावेदार टिकट हासिल करने वाले नेताओं के प्रोफाइल खंगाल रही हैं।
दरअसल, साफ छवि दिल्ली विधानसभा के चुनाव में इस बार चुनावी मुद्दा बन चुकी है, ऐसे में हर दल फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
पिछले दिनों एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म संस्था ने वर्ष 2008 के चुनाव में दिल्ली के 43 फीसदी उम्मीदवारों पर एफआईआर की रिपोर्ट सार्वजनिक की थी।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना आंदोलन से जन्म लेने वाली आम आदमी पार्टी (आप) भी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमा रही है। उसके निशाने पर शुरू से ही भाजपा व कांग्रेस के दागी विधायक व नेता हैं।
जनता से आप को मिल रहे रुझान का देखते हुए दिल्ली में दोनों दल विवादित उम्मीदवारों से पल्ला झाड़ने के मूड में हैं।
इसी कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कुछ ऐसे ही निर्देश दिए हैं। भाजपा ने भी तमाम रिस्क लेते हुए देरी से ही सही पर साफ छवि के नेता डॉ. हर्षवर्धन को मैदान में उतारकर अपनी मंशा साफ की है।
एडीआर के सर्वे के अनुसार जिन राज्यों में चुनाव घोषित हो चुके हैं, उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान व मिजोरम में पिछले चुनावों में घोषित उम्मीदवारों में से 13 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे, यानी 2008 के चुनाव में मैदान में उतरे 6870 उम्मीदवारों में से 879 पर आपराधिक मामले दर्ज थे।
जबकि 12 फीसदी उनमें करोड़पति थे तथा इनमें मात्र 8 फीसदी महिला उम्मीदवार थीं। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि अकेले दिल्ली में 43 फीसदी उम्मीदवारों पर एफआईआर दर्ज थी, जबकि भाजपा ने 35 फीसदी ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया था। आपराधिक मामलों के अलावा यहां के उम्मीदवार धनबल से भी सबसे ज्यादा मजबूत मिले।
कुल 69 प्रतिशत उम्मीदवार दिल्ली में करोड़पति थे, जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान में 46 फीसदी। महिला उम्मीदवारों के मामले में दिल्ली में सबसे कम 4 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया गया।
दिल्ली के मौजूदा राजनैतिक माहौल को देखते हुए ही कांग्रेस व भाजपा के नेताओं में टिकट कटने का डर समाया हुआ है। छत्तीसगढ़ में अभी तक भाजपा ने 67 व कांग्रेस ने 45 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
इस सूची को यहां टिकट मांगने वाले नेता तोल-मोल कर देख रहे हैं। जिसके चलते छत्तीसगढ़ में टिकट पाने वाले उम्मीदवारों का प्रोफाइल निकालकर कांग्रेस व भाजपा के नेता उनकी स्क्रीनिंग करने में लगे हुए हैं।
इस सूची के आधार पर ही दिल्ली के नेताजी अपना राजनैतिक भविष्य तलाश रहे हैं। विधानसभा चुनाव में टिकट की जुगत लगा रहे पांच-छह पार्षद भी सिविक सेंटर में छत्तीसगढ़ की सूची को लेकर अपने लिए गुणा-भाग करते दिखे।
इसके अलावा इनकी नजर अक्टूबर अंत तक राजस्थान व मध्य प्रदेश में जारी होने वाले दोनों पार्टियों के टिकट पर भी है। ज्ञात हो कि चुनाव के बाद भी अपने कार्यकाल में भाजपा व कांग्रेस के करीब एक दर्जन विधायक अपने आपराधिक रिकॉर्ड व मामलों को लेकर चर्चाओं में रहे।