सवाल: इस बार जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के मुद्दे क्या होंगे?
जवाब: छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 साल तक बीजेपी सरकार को देख लिया। 5 साल कांग्रेस की भी सरकार को मौका दिया। उन्होंने पाया कि दोनों में कोई अंतर नहीं है। दोनों ही राष्ट्रीय दल जनता के साथ वादाखिलाफी और भ्रष्टाचार करने में, दोनों में आपसी होड़ मची हुई है। ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे कांग्रेस और भाजपा ने ठगा नहीं। ऐसे में मुझको लगता है कि इस बार जनता चाहती है कि एक नए विकल्प को अवसर दें। पिछले चुनाव में हमारे पास बहुत कम समय था। मात्र 2 महीने का समय था। चुनाव आयोग ने हमें सिंबल दिया था। कम संसाधन थे। उसके बाद भी हमारे गठबंधन (जेसीसीजे-बसपा) के 7 विधायक बने। हमको 14 परसेंट लगभग वोट भी मिला। प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक क्षेत्रीय दल को मान्यता भी दी गई, तो मेरे पिताजी (अजीत जोगी) एक बहुत मजबूत नींव रखकर गए हैं। 2 लोगों (बीजेपी-कांग्रेस) को लगता है कि जोगी जी हमारे बीच नहीं रहे। कोरोना काल के दौरान उनका स्वर्गवास हो गया। उन लोगों को लगता है कि जोगी जी नहीं है, तो उनकी पार्टी अनाथ हो गई है। उन लोगों को मैं अमर उजाला के माध्यम से बोलना चाहूंगा कि मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि जिन लोगों के ऊपर सवा तीन करोड़ छत्तीसगढ़ियों का हाथ है, वो कभी अनाथ नहीं हो सकते। आज भले ही हमारे पास धनबल, सत्ताबल नहीं है पर जनबल है। अगर जोगी परिवार ने कुछ कमाया है, तो जनता का प्यार और उनका आशीर्वाद कमाया है।
सवाल: इस बार चुनाव में किन वादों के साथ जनता के बीच जाएंगे?
जवाब: मुझे लगता है कि दोनों दलों (बीजेपी-कांग्रेस) की जो नूरा कुश्ती है, ये दोनों आपस में कार्टून सीरियल 'टॉम एंड जेरी' की तरह लड़ते हैं।
इसमें बिल्ली कौन है, चूहा कौन है , ये तो जनता तय करेगी। मैं जो देख रहा हूं, जो खेल हो रहा है जनता के सामने। बिल्ली जब चूहे को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाती है, तो एक ऐसा पिजड़ा लगाती है, जिसके सामने का हिस्सा छोटा है मगर पीछे का जो दरवाजा है वह पूरा खुला रहता है। इस तरह की राजनीति से छत्तीसगढ़ की जनता त्रस्त है। भाजपा प्रमुख विपक्षी दल है , हालांकि 15 साल तक राज्य करने के बाद भी जनता उन्हें 13 से 14 सीटों तक ले आई। 15 सीटें भी नहीं छोड़ी। उस नतीजे के बाद बीजेपी कोमा में चली गई। इनको 'मोदियाबिंद' हो गया है। जैसे हमें- आपको मोतियाबिंद होता है। मोतियाबिंद ऐसी बीमारी है, जो उनको दूर की चीजें दिखती है। चीन दिख रहा है, पाकिस्तान दिख रहा है, हिंदू दिख रहा है, मुसलमान दिख रहा है। यह बड़ी-बड़ी बातें उनको दिखती हैं पर जो आम जनता से जुड़े हुए मुद्दे हैं, उस पर कोई चर्चा नहीं होती, कोई बहस नहीं होती। जहां तक कांग्रेस की बात है, उसे जो ऐतिहासिक जनादेश मिला, उसके दो कारण हैं। एक जो 15 साल तक रमन सरकार के खिलाफ जनता में रोष था, एंटी इन्कंबेंसी थी। दूसरा 2018 के विधानसभा चुनाव के 6 महीने पहले हमने (JCCJ) एक शपथ पत्र बनाया था। उसे उन्होंने (कांग्रेस ) उसकी फोटो कॉपी करके, उसका नाम बदल दिया। जनघोषणा पत्र उसका नाम कर दिया, जो बातें हमने कही थी, ठीक उसकी नकल की गई। कर्जा माफ, बिजली बिल हाफ, 2500 रुपए धान का समर्थन मूल्य, संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण, जितने हमारे मुद्दे थे, डिट्टो उन्होंने कॉपी किया। नकल करी लेकिन नकल करने में भी अकल की जरूरत होती है। 2500 रुपए धान का समर्थन मूल्य यदि उसको हम अलग कर दें, तो एक भी वादा जो उन्होंने 36 वादे किए थे, वह पूरा नहीं किया गया। स्थिति जस की तस है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पार कर गया। हमारा आप शपथ पत्र देख लीजिए। हमारे पिताजी ने देश की राजनीति में एक नई शुरुआत की थी। उन्होंने कहा था कि जनता का भरोसा राजनीति से खत्म होता जा रहा है, क्योंकि चुनाव के पहले बड़े-बड़े वादे होते हैं।
पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि सबको 15 लाख रुपए दे देंगे, यह कर देंगे, वह कर देंगे। कोई वादा पूरा नहीं होता। नेताओं को एकाउंटेबल जवाब दें , कैसे बनाया जाए। उन्होंने खुद हाईकोर्ट जाकर एक एफिडेविट भरा। जिसमें कहा था कि अगर मेरी सरकार आती है तो मैं इन बातों को पूरा करूंगा अगर नहीं करता हूं, तो छत्तीसगढ़ का कोई भी मतदाता मुझे कोर्ट के कटघरे में खड़ा करके मेरे विरूद्ध मुकदमा चला सकता है। मेरे को 2 साल तक की सजा भी दिला सकता है, तो अगर बीजेपी में दम है, कांग्रेस में दम है, जो वो इतनी ऊंची ऊंची बातें कर रहे हैं। उन्हें एफिडेविट में लिखकर देना चाहिए। उनका (सीएम भूपेश बघेल) भी एक नारा है 'नरवा, गरवा, घुरवा अउ बारी', छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी'। सबसे बड़ी समस्या नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी नहीं है। बेरोजगारी की समस्या है, उस पर कोई बात नहीं होती। अभी हमारे यहां विधानसभा सत्र चला। आरक्षण पर बहुत-बहुत बातें हुईं। इस समुदाय को कितना आरक्षण दिया जाए, उस समुदाय को कितना आरक्षण दिया जाए, लेकिन ये सब बातें हम बाद में तय कर लेंगे । पहले तो यह प्रावधान होना चाहिए कि छत्तीसगढ़ में जितनी भी नौकरियां हैं, जितने भी रोजगार हैं। चाहे वह प्राइवेट सेक्टर के, पब्लिक सेक्टर के, गवर्नमेंट के, चाहे एनजीओ के। सब में छत्तीसगढ़ के माटीपुत्रों के लिए कम से कम 95 प्रतिशत आरक्षण किया जाना चाहिए। इस बात पर एग्रीमेंट हो जाए फिर बाकी चीजें हम तय कर लेंगे, लेकिन इस बात पर बीजेपी और कांग्रेस कुछ नहीं करतीं। कांग्रेस के जो सबसे बड़े नेता (राहुल गांधी) हैं, छत्तीसगढ़ में आए और कहा कि आदिवासियों की जमीन 1 इंच भी उद्योगपतियों को नहीं देंगे। यह कारखाना नहीं खुलने देंगे। रमन सिंह ने अपने कार्यकाल में एक औद्योगिक घराने को 3 खदानें दी। मैं नाम नहीं लेना चाहूंगा। साढ़े 4 साल के कार्यकाल में आपने (कांग्रेस) ने उसी घराने को 15 खदानें दे दी, तो यह क्या हो रहा है। कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हमारे प्रदेश में केवल लूट की सरकार चल रही है। सीएम भूपेश बघेल पर तंज कसते हुए कहा कि अपने देश में एक कर प्रणाली है, लेकिन छत्तीसगढ़ में दो कर प्रणाली है, एक GST और दूसरा BST(भूपेश सेल्स टेक्स)। जीएसटी में अगर कहीं कुछ गड़बड़ी हो जाए तो उसको माफी है, लेकिन बीएसटी में कोयला निकाल रहे हो तो 25 रुपए प्रति टन BST जमा करो। लोहा निकाल रहे हो तो 130 रुपए प्रति टन जमा करो। रेत पर 6 हजार रुपया प्रति ट्रक जमा करो। शराब पर आप जितना सरकारी में दे रहे हो, उतना ही BST।में जमा करो। इस तरह की सुनियोजित और व्यवस्थित लूटपाट छत्तीसगढ़ के इतिहास में ही नहीं मैं समझता हूं कि भारत के इतिहास में भी कभी नहीं हुआ होगा।
सवाल: इस बार जेसीसीजे कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी ?
जवाब: 90, हमारा तो क्षेत्रीय पार्टी है। बातें उठती रहती हैं कि हमारी पार्टी कांग्रेस में विलय कर रही है। बीजेपी में विलय कर रही है। दोनों बातों से मैंने खंडन कर दिया, तो कहा गया कि नहीं आपकी पार्टी बीआरएस में विलय कर रही है। ये सब क्या बातें हैं? हमारा तो विलय छत्तीसगढ़ की जनता के साथ हो चुका है। आज की जो वर्तमान परिस्थितियां हैं। उसको देखते हुए मैं चाहता हूं कि जो प्रदेश का गैर कांग्रेसी मतदाता है। गैर भाजपाई वोट हैं। वह भी खंडित ना हो कुछ क्षेत्रीय पार्टियां हैं मान्यता भले ही नहीं मिली है पर हमारे प्रदेश के इतिहास में उनका अभी तक खाता भी नहीं खुला है, लेकिन वह अपने-अपने स्थानों में प्रभाव रखती हैं। मुझको लगता है कि जोगी जी और उनका प्रभाव अगर मिल जाए, तो हम लोग वहां पर विधायक निश्चित रूप से बना सकते हैं। बशर्ते जैसे सरगुजा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी 30 साल से काम कर रही है। वहां के आदिवासियों की लड़ाई लड़ रही है। अभी हाल ही में बस्तर में जब पेसा कानून का उल्लंघन किया जा रहा था, इस सरकार के द्वारा। खदानें निजी घरानों को नीलाम की जा रही थी तो एक सर्व आदिवासी समाज वहां पर खड़ा हुआ, जो अपनी मातृभूमि, अपने लोगों की संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई लड़ी, तो मैं चाहूंगा कि सर्व आदिवासी समाज के साथ बस्तर में। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ सरगुजा में। मैदानी इलाकों में और जो प्लेयर हैं, उनके साथ भी हम साझा रणनीति बनाएंगे। भले ही इसका मैं नेतृत्व ना करूं। मुझसे भी कई और वरिष्ठ नेता हैं। अरविंद नेताम कोई भी करें। यह लड़ाई अमित जोगी जोगी पार्टी की नहीं है। यह लड़ाई छत्तीसगढ़ के भविष्य की है। बीजेपी, कांग्रेस और हमारी पार्टी में एक ही अंतर है। दोनों पार्टियों का हाईकमान दिल्ली में है। कुछ भी करना है तो उनके नेता दिल्ली कूच करते हैं। वहां से परमिशन लेकर आते हैं पर अमित जोगी की पार्टी का स्वर्गीय अजीत जोगी की पार्टी का हाईकमान जो है, वह दिल्ली नहीं छत्तीसगढ़ की जनता है। मुझे किसी से परमिशन लेने की जरूरत नहीं है। ना मोदी जी से, ना राहुल जी से किसी से। अगर छत्तीसगढ़ की जनता का आदेश होगा तो 3200 रुपए धान का समर्थन मूल्य दूंगा। अन्य राज्यों में 15 सौ और 3 हजार पेंशन मिल रही है तो मैं लागू करूंगा। अन्य राज्यों में 95 परसेंट तो कई राज्यों में सौ पर्सेंट माटीमाटी पुत्रों के लिए आरक्षण कर दिया गया है, हमारे यहां भी ऐसा करो, तो अमित जोगी करेगा। बिना किसी से पूछे। (संकेत दिया कि यदि जेसीसीजे इस बार सत्ता में आई तो ये वादें पूरा करें) देखिए, मेरा नाम जोगी है, जोगी जी का खून मेरे रंगों में दौड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के लोग जानते हैं कि जोगी है तो जान चली जाएगी , लेकिन जुबान नहीं जाएगी।
सवाल: बीजेपी पीएम आवास और केंद्रीय योजनाओं की सफलता गिना रही है, ऐसे में JCCJ की क्या रणनीति होगी?
जवाब: पीएम आवास जो है, पिछले साढे 4 सालों से बंद है। गरीब 12 लाख हितग्राहियों के आवास कार्य का निर्माण या तो रुक गया है या शुरू ही नहीं हुआ। क्योंकि राज्य सरकार ने अपना अंशदान नहीं दिया है। इन साढ़े चार सालों में भारतीय जनता पार्टी क्या कर रही थी? आपने क्यों नहीं कदम उठाएं, अब विधानसभा चुनाव आ गया है, तो आपको याद आ रही है? प्रधानमंत्री जी बोल कर गए कि हमारी सरकार बनेगी तो हम तत्काल शराबबंदी लागू कर देंगे। 15 साल आप की सरकार थी । रमन सिंह शुरू हुए थे चाउर वाले बाबा से और 15 साल में जनता ने उन्हें दारूवाला बाबा बना दिया। केवल दारू बेचने का काम किया। छत्तीसगढ़ जैसे बहुत ही कम राज्य हैं, जहां सरकार खुद शराब बेचने का काम करती है। ऐसी व्यवस्था लेकर आए तो यह क्या शराबबंदी की बातें करते हैं। नियमितीकरण कर देंगे, कहते हैं कांग्रेस ने कहा था कि 10 दिन के भीतर कर देंगे पर एक किसी का नहीं हुआ। 5 साल हो चुके अब बीजेपी बोल रही है कि हम कर देंगे। आपको तो 15 साल जनता ने मौका दिया तब क्यों नहीं किया? यह सब बोलना बड़ा आसान है। बीजेपी तो बोलती है हर चुनाव के बाद कि वह तो वह तो हमारे चुनावी जुमले थे, तो छत्तीसगढ़ की जनता इन इनके चक्कर में नहीं आने वाली और जो भूपेश बघेल की सरकार है। मैं मानता हूं लोगों को लगता है कि ये सरकार वापस आ जाएगी, इसलिए आएगी कि क्योंकि बीजेपी जो है वह भूपेश बघेल के कंट्रोल में हैं, जो स्टेट के बीजेपी नेता हैं वह बघेल के कंट्रोल में हैं। केंद्र में जो बीजेपी के नेता हैं भूपेश बघेल जी उनसे डरे हुए बैठे हैं और उनके कंट्रोल में है। यह सब मिले हुए हैं और जनता इस बात को समझ रही है।