आज महंगाई के दौर में लोग शादी-ब्याह में लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं। शादी ब्याह में बड़े-बड़े होटलों की बुकिंग से लेकर गाजे-बाजे, बारात और पार्टी में लाखों रुपये पानी की तरह बहाये जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विशेष विवाह अधिनियम के तहत बहुत ही सरल, सहज और सादगी के साथ कोर्ट मैरिज हो रही है, जो लोगों की पहुंच में है। अब लोगों का रुझान इन दिनों कोर्ट मैरिज की ओर बढ़ रहा है। इस मैरिज में न दहेज की झंझट और न ही पसंद-नापसंद की समस्या। दोनों वर-वधू, चंद रिश्तेदार और दोस्तों की मौजूदगी में विवाह संपन्न हो जाता है। ये बातें अधिवक्ता भगवानू नायक, अधिवक्ता उर्वशी घोष, प्रदीप साहू ने कहीं।
उन्होंने अपने पक्षकार कोटा रायपुर निवासी कृष्णा हिआल और संतोषी बाघ का कोर्ट मैरिज करवाया। उन्होंने कहा कि कलेक्टोरेट परिसर रायपुर स्थित विवाह अधिकारी निधि साहू के समक्ष लगभग 8 जोड़ों ने कोर्ट मैरिज किया। उन्होंने कहा कोर्ट मैरिज एक लीगल मैरिज है, जिसके कई फायदें हैं। कोर्ट मैरिज के पहले विवाह अधिकारी कार्यालय वर-वधू के जन्म, निवास आदि दस्तावेजों का परीक्षण करता है। अखबार में प्रकाशन कर आपत्तियां मंगाई जाती हैं और गवाहों की उपस्थिति में विवाह अधिकारी विवाह सम्पन्न कराते हैं। कोर्ट मैरिज के दौरान अधिवक्ता भगवानू नायक, अधिवक्ता उर्वशी घोष, प्रदीप साहू, मयंक पंजवानी, अनिरुद्ध नेताम, वर वधू की ओर से प्रदीप बाघ, यशोदा बाघ, धर्मेंद्र मोंगराज आदि उपस्थित रहे।