शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी है। इसके बिना जीवन अधूरा है। यह न केवल रोजगार का माध्यम है, बल्कि समग्र विकास का आधार भी है। आदर्श छात्र के पांच लक्षण होते हैं। 'काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च अल्पहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं'। ये बातें छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने आज मंगलवार को मुंगली जिले के प्रवास के दौरान कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने, कभी निराश न होने और परिश्रम को अपना मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया।
सीएम ने विद्यार्थियों को अनुशासित, मेहनती और लक्ष्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा दी। एक छात्र की ओर से सोशल मीडिया के प्रभाव पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अच्छाई को अपनाएं और बुराई से दूर रहें। साय ने अपने छात्र जीवन के संघर्ष साझा करते हुए कहा कि अविभाजित रायगढ़ जिले में शिक्षा के अवसर सीमित थे। नटवर स्कूल ही एकमात्र विकल्प था।
मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ और ‘नालंदा परिसर’ जैसे शैक्षणिक नवाचारों की सराहना की और कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में आधुनिक ग्रंथालय स्थापित किए जाएं। उन्होंने मुंगेली जिला ग्रंथालय की सराहना करते हुए बताया कि यह ग्रंथालय अब तक सैकड़ों युवाओं की सफलता की नींव बन चुका है। उन्होंने इसे केवल अध्ययन का स्थल न मानकर एक सफलता केंद्र बताया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री को तोप सिंह कुंभकार ने उनके चित्र का हस्तनिर्मित छायाचित्र तथा भगवद् गीता और अन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए।
इस जिला ग्रंथालय में वर्तमान में यहाँ 4780 से अधिक पुस्तकों का संग्रह, 893 पंजीकृत सदस्य, 32 टेबल, 11 सीसीटीवी कैमरे हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
'काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च
अल्पहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं'
जानें इस श्लोक का महत्व-
1. काक चेष्टा (कौए जैसी कोशिश)
कौआ बहुत ही चतुर और परिश्रमी पक्षी होता है। वह लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। एक विद्यार्थी को भी अपनी पढ़ाई में ऐसी ही लगन और निरंतर प्रयास करने की आदत डालनी चाहिए।
2. बको ध्यानं (बगुले जैसा ध्यान)
बगुला मछली पकड़ने के लिए पूर्ण एकाग्रता के साथ पानी में खड़ा रहता है। ठीक इसी तरह, विद्यार्थी को भी पढ़ाई के समय पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए और इधर-उधर की बातों में ध्यान भटकाने से बचना चाहिए।
3.श्वान निद्रा (कुत्ते जैसी सतर्क नींद)
कुत्ता हल्की सी आहट से भी जाग जाता है। विद्यार्थी को भी अधिक गहरी नींद लेने के बजाय कम सोकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए ताकि उसका पढ़ाई में कोई नुकसान न हो।
4. अल्पहारी (कम भोजन करने वाला)
विद्यार्थियों को अधिक भारी भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में आलस्य बढ़ सकता है। हल्का और पौष्टिक भोजन करने से दिमाग तेज होता है और एकाग्रता बनी रहती है।
5. गृह त्यागी (घर छोड़ने वाला यानी आराम से दूर रहने वाला)
अच्छे विद्यार्थी को आराम और विलासिता से दूर रहकर पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मेहनत करना जरूरी है, इसलिए आलस्य त्यागकर पढ़ाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।